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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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इतिहास में सिखों की दुश्मनी मुगलों से ,पठानों से य अन्य आक्रमणकारियों से कभी हुई ही नही है ।
त्यागमल सोढ़ी जिन्हें तेगबहादुर कहते हैं । वह औरंगजेब के समर्थन में असम गए थें "अहोमो" को हराने के लिए । तब अहोमो के तरफ से लाचित बरफुकन ने मुगल सेना के साथ इनको खदेड़ा था । आज भी एनडीए के सर्वश्रेष्ठ कैडेट को "लाचित बरफुकन" सम्मान से ही सम्मानित किया जाता है ।
हिन्दू पेशवाओं ने सिखों को अहमद शाह अब्दाली से बचाया, अब्दाली द्वारा तोड़े गए स्वर्ण मंदिर को फिर से बनवाया पर जब पेशवा और अब्दाली पानीपत के तीसरे युद्ध में भिड़ें तो सिख लूट के आधे हिस्से के शर्त के साथ अब्दाली के गुट में जा मिले ।
1857 में भी यह अंग्रेज़ों के साथ थें । जलियांवाला बाग वाले जनरल डायर को इन्होंने स्वर्ण मंदिर में सम्मानित करा था ।
यह आजादी के लिए सबसे ज्यादा फाँसी में चढ़ें और हिन्दुओ के लिये कुर्बानी दिए यह व्हाट्सअप यूनिवर्सिटी वालों का बस मकड़जाल है।
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