सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

अमेरिका के बड़े पत्रकार फ़रीद ज़कारिया ने अमेरिका चुनावों की सीएनएन पर बेहतरीन एनालिसिस किया है।

अमेरिका के बड़े पत्रकार फ़रीद ज़कारिया ने अमेरिका चुनावों की सीएनएन पर बेहतरीन एनालिसिस किया है। 
उन्होंने लेफ्ट लिबरल गैंग के बारे में CNN जैसे लेफ्ट लिबरल चैनल पर अपने शो में कहा कि आइडेंटिटी पॉलिटिक्स के अति ने दशकों से बनाये उनके नैरेटिव को क्षति पहुँचाई है। जब लोग घर के लिए, भोजन के लिए और नौकरी के लिए परेशान थे तब लेफ्ट लिबरल गिरोह का पूरा ध्यान गे, लेस्बियन, ट्रांस, ही, शी, दे, देम जैसे बेवक़ूफ़ियों पर टिका था। यह सब पूरी तरह से लोगों का ध्यान भटकाने वाला कारनामा था। लोगों के असली समस्याओं और भावनाओं से ध्यान हटाने के लिए नक़ली मुद्दे खड़े किए गए। 
आगे उन्होंने कहा कि लोग परेशान थे कि अवैध प्रवासी उनके संस्कृति के लिए ख़तरा बन रहे हैं, उनके जीवन के लिए ख़तरा बन रहे हैं, उनके जीवन मूल्यों के लिए ख़तरा बन रहे हैं लेकिन लेफ्ट लिबरल गैंग का पूरा ध्यान इन वास्तविक भावनाओं से इतर इन ग़ैरक़ानूनी प्रवासियों को अपनाने और संभवतः आगे चलकर उनको अपना वोटर वर्ग बनाने की तरफ़ था। 
इन सबसे महत्वपूर्ण बात उन्होंने जो कही वह ये थी कि लेफ्ट लिबरल जिन लक्ष्यों को पाना चाहते थे अर्थात् एक लिबरल समाज, उसको पाने का उनका तरीक़ा बिल्कुल भी लिबरल नहीं था। इन्होंने ट्रम्प समर्थकों, अपने राष्ट्रीयता से प्रेम करने वाले अमरीकियों और अपने जीवन मूल्यों को मानने वाले उन ईसाइयों को जो इन सबकी रक्षा करना चाहते थे, उन्हें भिन्न मत का मानने के बजाय उनसे शत्रुता मोल लेने लगे। ट्रम्प के प्रति सहानुभूति रखने वाले लोगों को ये मूर्ख, सनकी, रंगभेदी आदि बताने के प्रयास में इस चरम पर चले गये कि ये लेफ्ट लिबरल बेहद कट्टर होते गये। कट्टर लिबरल होना एक हिप्पोक्रेसी है। लोगों को समझ आ गया कि ये लोग किसी भी तरह से लिबरल लोग नहीं हैं बल्कि ये लोग मुद्दों को डाइवर्ट करने वाले लोग हैं।
उपरोक्त कारणों से लोगों के मन में ट्रम्प के प्रति घृणा के बजाय सहानुभूति का भाव आने लगा।
लेफ्ट लिबरल डिसेंट और असहमति को समझने वाले लोकतांत्रिक लोग माने जाते थे लेकिन ये लोग ख़ुद ही डेमोक्रेसी की रक्षा और लिबरलिजम के नाम पर ट्रम्प एवं ट्रम्प समर्थकों को बोलने का अधिकार छीन लिया। ट्रम्प एवं ट्रम्प समर्थकों का ट्विटर अकाउंट, यूट्यूब अकाउंट बंद कर दिया गया। मेनस्ट्रीम मीडिया में उनको दिखाना बंद कर दिया गया। एक के बाद एक आरोप लगाकर उन्हें जेल भेजने, अयोग्य घोषित करने के लिए प्रयास होने लगे, जैसे जैसे लेफ्ट लिबरल गैंग ये सब लिबरलिज़म के नाम पर करता रहा वैसे वैसे लोग ट्रम्प के पास जाते रहे।
फ़रीद का मानना है कि इस बार जो झटका लेफ्ट लिबरल लॉबी को लगा है, वह बहुत बड़ा है। इससे उबरने में बहुत समय लगेगा। वह सारे मुद्दे जो इन्होंने जनता के सामने फेक आर्टिकल, फेक रिसर्च और फेक न्यूज़ के रूप के परोसा है, वह सब ट्रम्प प्रशासन एक सिरे से न केवल एक्सपोज करेगा बल्कि उसे ख़ारिज कर सकते हैं। उन्होंने ट्रम्प द्वारा प्रसारित किए गए एक छोटे से ऐड की भी चर्चा की जिसमें गंदे भद्दे से दिखने वाले एक गे और लेस्बियन के पीछे कमला हैरिस खड़ी थी जिसके बाद कहा जा रहा था “कमला इज फॉर देम” उसके ट्रम्प की एक मुस्कुराती फोटो आती थी जिसमें एक सुंदर सा कपल एक छोटे से बच्चे को अपने परिवार में गोद में खिला रहे होते हैं और उसके बाद कहा जाता है “ट्रम्प इज़ फॉर अस”। इस ऐड ने स्पष्ट रूप से अमेरिका में यह असर डाला कि LGBTQ के नाम पर जो फ़र्ज़ी फ़र्ज़ी नैरेटिव सेट किया गया उसने हमारे परिवार को तबाह किया है। इस विज्ञापन ने लोगों के दिमाग़ पर बहुत तीखा असर डाला है।
इस बीच फ़रीद ज़कारिया की ही बात को आगे बढ़ाते हुए एक मीम अमेरिका में बहुत तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस मीम में एक कमला हैरिस समर्थक अपने भाई से कहता है कि तुम घृणा के बदले प्यार चुनो, कट्टरता के बदले उदारता चुनो, तुम कमला को वोट दो। यदि तुमने गलती से भी प्यार और उदारता को नहीं चुना तो मैं तुम्हारे घर में आग लगा दूँगा, तुम्हारा जीना मुश्किल कर दूँगा। 
अमेरिका के चुनाव वैश्विक शांति और वैश्विक प्रगति के दृष्टि से बेहद महत्व के हैं। यह चुनाव फ़ार्मा लॉबी और हथियार लॉबी के लिए एक बड़ा झटका है। लोकतंत्र के नाम पर भावनात्मक लोगों का ब्रेनवाश करके समाज में अस्थिरता लाने वालों के लिए भी झटका है। यह सब भारत के हित में है और हमें भी यह सोचना चाहिए की भारत में हम किस तरह से इन लेफ्ट लिबरल गिरोह की कमर तोड़ें।

Bhupendra Singh

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