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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
वामी कांगी इको सिस्टम राहुल गांधी को गरीबों का मसीहा क्यों बनाना चाहता है इसके पीछे भयानक सच जानने के लिए पढ़ें पूरा विश्लेषण
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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गांधी नेहरू परिवार ने 1947 से गरीबी हटाओ नारा दे रहे हैं फिर आज तक गरीबी नहीं हटी अब कह रहे हम सत्ता में आएंगे तो न्याय करेंगे और नारा दे रहे अब होगा न्याय इन लोगों से एक प्रश्न कांग्रेस तो इस देश में 60 वर्ष सत्ता में रही है योजना आयोग के माध्यम से इस देश में मार्क्सवादी सम्मवादी आर्थिक नीतियों को थोपने वाली कांग्रेस जिसके कारण 1990 आते आते भारत दिवालिया होने के कगार पहुंच गया था, और भारत को लंदन के बैंक सोना गिरवी रखना पड़ा था कांग्रेस ने इस देश के हालात इस तरह का बना दिए थे कोई छोटा उद्यमी और व्यवसायी एक सुई बनाने के लिए सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता था । कोई देश बिना उद्यमिता और निजी निवेश को बढ़ावा दिए आगे नहीं बढ़ सकता लेकिन कांग्रेस की सरकारें उद्यमियों से घृणा करती थी उन्हें चोर मानतीं थी निजी निवेश को गलत मानती थी। दुनिया में कोई सरकार व्यापार नहीं करती है यहां तक कम्युनिस्ट पार्टी की जहां सरकार वहां तक की सरकारें व्यापार नहीं करती है क्योंकि सरकारें जब व्यापार करने लगती जिसका अर्थव्यवस्था नकारात्मक प्रभाव पड़ता उद्यमिता को बढ़ावा नहीं मिल पाता और निजी निवेश भी समाप्त हो जाता है । लेकिन भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू अपने मार्क्सवादी विचारधारा के पूर्वाग्रह से इतने ग्रस्त थे कि भारत को पूरी तरह सम्मवादी कम्युनिस्ट सिस्टम को योजना आयोग और पंचवर्षीय योजना के माध्यम से भारतीय समाज के उपर थोप दिया था। भारतीय समाज आदि काल से नगरीय सभ्यता और व्यापार प्रधान और खुले बाजार की व्यवस्था का समर्थक समाज रहा है जिसके कारण हम लोग 16 वी सदी तक दुनिया की अर्थव्यवस्था में 30% तक योगदान दिया करते थे एक रिपोर्ट में खुलासा भी हुआ कि अग्रेज भारत से 45 ट्रिलियन डॉलर लूटकर ले गए हैं अब सोच लिजिए भारत कितना संपन्न देश था । पहले अंग्रेजों ने इस देश को लूटा फिर गांधी नेहरू परिवार और काग्रेस ने लूटा इस देश को लुटने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
गैर गांधी परिवार से बाहर के व्यक्ति और सनातन मूल्यों को मानने वाले प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव बने और विपक्ष में सनातनी मूल्यों को मानने वाली पार्टी मुख्य विपक्षी पार्टी की भूमिका थी और और पक्ष और विपक्ष ने मिलकर पीवी नरसिम्हा राव ने बड़े आर्थिक सुधारों को लागू किया उस वक्त उन आर्थिक सुधारों का सबसे ज्यादा विरोध कम्युनिस्ट और कांग्रेस पोषित उद्योगपतियों ने विरोध किया जब बंद आर्थिक मॉडल से देश को मुक्ति मिली तो जो इस सिस्टम का लाभार्थी वर्ग वह विरोध में खड़ा हो गया लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा ने उदारीकरण का समर्थन किया जिसके कारण देश आज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।
गांधी परिवार और काग्रेस 60 वर्ष सत्ता में रही फिर गरीबो रोटी कपड़ा मकान जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं करा पाई थी । कांग्रेस इस देश में सत्ता में थी ढंग की एक सड़क नहीं बना पाई थी गांव की सड़कों में मिट्टी डाल दिया जाता था उसे विकास बता दिया जाता है। बिजली पानी का तो बुरा हाल था। जिस भाजपा की अटल जी की और नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया और गरीबों मूल भूत सुविधाएं मुहैया कराई भारत को मैनुफैक्चरिंग हब बनाने का प्रयास किया और आज भी कर रही है गरीबों के जीवन स्तर सुधरने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास कर रही है , दुसरी ओर कांग्रेस सड़े हुए कम्युनिस्ट मॉडल का लाश ढो रही है । राहुल गांधी स्वयं शेयर बाजार में निवेश करेंगे हजारों करोड़ों संपत्ति बनाएंगे कोई व्यक्ति अपने परिश्रम अपने पुरूषार्थ के दम पर संपत्ति अर्जित की है और टैक्स देकर राष्ट्र निर्माण में अपनी महती भूमिका की अदा की है उसकी संपत्ति छीनकर निकम्मों बंटने की बात करने वाले मार्क्सवादी लेनिनवादी माओवादी विचारधारा से ग्रसित राहुल गांधी को गरीबों का मसीहा बताया जा रहा है।
मार्क्सवाद का अफीम इतना भी नही चाटना चाहिए सही ग़लत में फर्क भी नहीं कर पाए , राहुल गांधी को गरीबों मसीहा बताकर गरीबों का मज़ाक़ उड़ाना बंद करना चाहिए। जिस कम्युनिस्ट सम्मवादी सिस्टम के कारण देश दिवालिया हुआ था वही सिस्टम फिर जबरदस्ती थोपने की वकालत करने वाला मार्क्सवादी नेता राहुल गांधी हिंदू समाज को जातियों विभाजित करके राष्ट्र विरोधी देश तोड़क इस्लामिक, ईसाई मिशनरियों ,वैश्विक लेफ्ट ग्लोबल मार्केट फोर्सेज के हाथों का खिलौना बनकर देश को गृहयुद्ध में झोंक कर अपनी राजनीतिक दुकान चलाने का स्वप्न देखने वाला मार्क्सवादी नेता राहुल गांधी और देश को आर्थिक समाजिक राजनैतिक अराजकता की ओर ढकेलकर देश को 1970 के लाइसेंस कोंटा राज के युग में लें जाने स्वप्न सजाने वाला मार्क्सवादी नेता राहुल गांधी गरीब को और गरीब बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने वाला व्यक्ति गरीबों का मसीहा हो गया देश को की विश्व आर्थिक समाजिक आध्यत्मिक ग़रीब कल्याण के लिए जीवन खपाने वाले भाजपा और संघ के स्वयंसेवक और एक स्वयंसेवक प्रधानमंत्री ग़रीब विरोधी हों गया इतना दोगलापन खुरपेंच जैसे लोग कहा से लाते हैं।
दीपक कुमार द्विवेदी
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