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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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आदौ कुलं परीक्षेत ततो विद्यां ततो वयं शीलं धनं ततो रूपं देशं पश्चाद्विवाहयेत् || कन्या वरयेत रूपं, माता वित्तं, पिता श्रुतम्, बान्धवा: कुलमिच्छन्ति, मिष्टान्नमितरे जना:||
1: कुल
लड़के के माता-पिता दादा-दादी नाना-नानी कैसे थे कहाँ के थे?
2: योग्यता
लड़के की शिक्षा क्या है
अपने परिवार का पालन करने की योग्यता रखता है या नहीं!
3:अवस्था
लड़के की आयु में बहुत अन्तर तो नहीं है!
4:शील
बात-बात में पिनकता तो नही अर्थात मुंह फुलाने वाला नक चढा़ तो नही है धीर-गम्भीर प्रसन्न-चित्त व्यवहारिक मैत्री-शील वाला हो।
5: धन
धन बढ़ाने की प्रवृति है या अय्याशी के लिए पैसा पानी की तरह बहाता तो नहीं है!
6: रूप
लड़के का रंग-रूप-कद-काठी बेटी अनुकूल है कि नहीं!
7: देश
किस देश, प्रान्त, नगर, सेक्टर, में रहता है और वहां का रहन सहन कैसा है।।।।।।।।
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