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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
लोकसभा चुनाव से पहले मेरा यह विचार था के पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के पश्चात प्रधानमंत्री 2025-2026 में राजनीति से सन्यास ले नए उत्तराधिकारी को पद सौंप दें।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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किन्तु चुनाव परिणामों ने मेरा यह विचार बदल दिया है, अब मेरा यह स्पष्ट विचार है अगले लोकसभा चुनाव से पहले कदापि सन्यास ना लें। चाहे लाख मजबूरी क्यों न हो अब हर हाल में यह सरकार चलानी चाहिए, सरकार ना भी चले तो भी सरकार में बने रहना अति आवश्यक है। प्रधानमंत्री को कुछ महत्वपूर्ण ध्येय को केंद्र में रखते हुए उन्हें अपने हाथों से पूरा करना होगा, इसलिए हिन्दुओं द्वारा दिए जनादेश का सम्मान करते हुए केंद्र में बने रहना भाजपा का प्रथम दायित्व है। भूले से भी 1998 जैसी वह भूल नहीं होनी चाहिए जो सरकार छोड़कर भाजप ने तब की थी।
• 2026-27 में राष्ट्रीय जनगणना कराने का दायित्व: 2011 की जनगणना में तत्कालीन सरकार ने सुनियोजित ढंग से बहुत बड़ा धोखा किया था। उसने देश के कई राज्यों में जनजातीय वर्ग को ईसाई और other रिलीजन की श्रेणी में डाल दिया था। यह हिन्दुओं की जनसंख्या कम दिखाने का षडयंत्र था। अन्य कई जातियों में भी ऐसा करने का खेल हुआ था।
• नया परिसीमन का दायित्व: मुस्लिम वोट अधिक सीटों पर निर्णायक स्थिति में ना हों यह सुनिश्चित करने हेतु मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्रों को एक लोकसभा में एकत्रित करना आवश्यक है। स्पष्ट कहें तो मुस्लिम जनसंख्या वाले राज्यों में इनके 5 सीटों पर निर्णायक स्थिति में रहने से अच्छा है इन्हें 1 या डेढ़ सीट पर एकत्रित कर दिया जाए। इससे एक सीट सीधे इनके खाते में गिरेगी दूसरी पर करीबी फाइट रहेगी हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच, पर 3 सीटें सीधा हिन्दुओं के खाते में जाएगी। परंतु यह सब हो पाएगा नया परिसीमन अपने अनुसार करवाने से।
• महिला आरक्षित सीटें: नए परिसीमन में लोकसभा क्षेत्रों की संख्या 543 से बढ़ाकर 750 होनी हैं, जिसमें 33% निर्वाचन क्षेत्र महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान है। महिला आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों का सूची बनाते समय कुछ सीटों को इस सोची में रखना सुनिश्चित होना चाहिए।
जिसमें :- लद्दाख, श्रीनगर, जालंधर, पटियाला, चण्डीगढ़, अम्बाला, हिसार, रोहतक, नई दिल्ली, मंडी, हरिद्वार, बाड़मेर, दौसा, बांसवाड़ा, सीकर, झुंझुनूं, सवाई माधोपुर, सहारनपुर, कैराना, बागपत, मेरठ, नगीना, रामपुर, मुरादाबाद, संभल, बदायूं, फिरोजाबाद, कन्नौज, रायबरेली, अमेठी, वाराणसी, बाराबंकी, अयोध्या, प्रतापगढ़, प्रयागराज, आजमगढ़, घोसी, बलिया, सारण, पाटलिपुत्र, मुंगेर, काराकाट, पुर्णिया, कटिहार, अररिया, बक्सर, खगड़िया, जमुई, दुमका, गिरडिह, राजमहल, सिंहभूम, कोरापुट, आसनसोल, धुबरी, जोरहाट, सूरत, छिंदवाड़ा, मुम्बई साउथ, नांदेड़, चंद्रपुर, हैदराबाद, तिरुपति, गोवा दक्षिण, बंगलुरु ग्रामीण, वायनाड, रामेश्वरम, शिवगंगा, नीलगिरी, तंजौर, मदुरई, नागपटनम जैसी सीटें महिला आरक्षित की जाएं।
• Fresh फेस को Fresh जनादेश: यदि इस कार्यकाल में हम प्रधानमंत्री किसी और को बनाने हैं तो उस नए चेहरे को 2 नुकसान होंगे। जहां उसे एक तरफ पुरानी एंटी इनकंबेंसी का सामना पड़ेगा, तो दूसरी तरफ पूर्ण बहुमत से वंचित वाली गठबंधन सरकार चलाने पर उसपर कमजोर प्रधानमंत्री होने का ठप्पा लगेगा। इसलिए fresh प्रधानमंत्री फेस को fresh जनादेश मिले उसके लिए पहले प्रधानमंत्री के रहते हुए ही चुनाव लड़ा जाए और पूर्ण बहुमत प्राप्त किया जाए। ताकि नए प्रधानमंत्री को एंटी इनकंबेंसी का सामना ना करना पड़े और उसे अपने आप को सिद्ध करने हेतु पूरा 5 वर्षीय कार्यकाल मिले।
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जबतक उपरोक्त 3 कार्य पूर्ण नही हो जाते तबतक सरकार को देश से जुड़े अन्य विषयों पर ध्यान केंद्रित रखना होगा। जिसमें विदेशी ताकतों को देश की सत्ता से दूर रखना, भारत की सफल विदेश नीति को जारी रखना, वर्तमान में देश की आर्थिक वृद्धि की गति को निरंतर रखना, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी कार्यक्रमों को जारी रखना, आंतरिक आतंकवाद पर नकेल कसे रखना, देश में गृहयुद्ध रोके रखना, 2028 तक नक्सलवाद का पूर्ण सफाया करना, भाजपा शासित राज्यों पर केन्द्र की छत्रछाया बनाए रखना, मस्जिदों के कब्जे वाले प्राचीन मंदिरों पर पुरातत्व विभाग का सर्वे जारी रखना।
• इस कार्यकाल के बीच-बीच में वक्फ संशोधन तथा UCC जैसे बिलों पर अपने प्रयास जारी रखना।
✍️ आर्यन
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