एससी एसटी ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण के मुद्दे पर Bharatiya Janata Party (BJP) न्यूट्रल रहती है तो और किसी के दबाव में आकर SC ST एक्ट जैसा निर्णय नहीं करती है एससी एसटी ओबीसी समुदाय के बड़े वर्ग का समर्थन Narendra Modi जी और बीजेपी को मिलेगा लेकिन गलती से सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटती है एससी एसटी ओबीसी समुदाय के बड़े वर्ग का वोट मिलने की संभावना खत्म हो जाएगी। एससी एसटी ओबीसी समुदाय में जो संपन्न और सक्षम जातिया जो 70 से 90% तक एससी एसटी आरक्षण की लाभार्थी जातियां हैं वो किसी भी हालात में बीजेपी को वोट नहीं देंगी चुनाव में एससी एसटी ओबीसी आईडेंटिटी के नाम अपने समाज के बड़े वर्ग बहकाने का भी प्रयास करेगी बीजेपी आएगी संविधान बदल देगी आरक्षण खत्म कर देगी उनके बहकावे में एससी एसटी ओबीसी समुदाय का बड़ा वर्ग आ भी जाएगा लेकिन एससी एसटी ओबीसी समुदाय में आरक्षण के उपवर्गीकरण का निर्णय लागू हो जाएगा जिन्हें आरक्षण का लाभ आज तक नहीं मिला है तो अपने समुदाय में जो सबसे अधिक आरक्षण की लाभार्थी जातियां जैसे एससी आरक्षण में जाटव महार पासवान एसटी आरक्षण में मीणा ओबीसी आरक्षण में यादव कुर्मी कुशवाहा जाट सबसे अधिक आरक्षण की लाभार्थी जातियां जिन्हें आरक्षण का लाभ मिला वो इनसे प्रश्न करेंगी इस स्थिति में एससी एसटी ओबीसी आईडेंटिटी के नाम पर कोई जाति वोट नहीं देंगी जिसका सबसे बड़ा बड़ा फायदा हिंदू एकता के रूप में इस देश में 7500 से उपर जातियां कई जातियों संख्या 0.5 से कम है वो छोटी छोटी जातियां हिंदू आईडेंटिटी के नाम पर एक जाएंगी जातिगत राजनीति में लठैत जातियों का वर्चस्व खत्म हो जाएगा जिसका फायदा यह होगा कोई मुस्लिम यादव दलित मुस्लिम सवर्ण भद्रलोक मुस्लिम मराठा मुस्लिम जाट मुस्लिम जैसे समीकरण बनाकर राजनीति नहीं कर पाएगा उसे छोटी छोटी जातियों को प्रतिनिधित्व देना पड़ेगा इसके कारण भविष्य में इस देश में जातियों के नाम पर राजनीति खत्म हो जाएगी जातियों उपर राजनीति खत्म करने के लिए जातिगत आधरित आर्थिक सर्वेक्षण होना चाहिए किस जाति को कितना आरक्षण का लाभ हुआ आरक्षण लागू होने के पहले इन जातियों स्थिति क्या आरक्षण लागू होने के बाद क्या स्थिति है? इसके आलावा गैर आरक्षित वर्ग की क्या स्थिति है? स्किल सर्वेक्षण एवं शिक्षा स्तर क्या है पूर्व में क्या था? इन विषयों को पता करने के लिए एक जातिगत आधरित आर्थिक सर्वेक्षण होना आवश्यक इससे वस्तुस्थिति पता चल पाएगी बहुत हद तक जातियों को स्थिति को समझ भी पाएंगे जिसके आधार पर सरकार को योजना बनाने में मदद मिलेगी नहीं तो ऐसे हवा तीर चलाते रहेंगे उसका परिणाम कुछ नहीं निकलेगा PMO India Amit Shah जी इस बार की जनगणना में जातिगत आर्थिक सर्वेक्षण को शामिल करें सर्वेक्षण के डेटा के आधार पर जातियों की 200 से 300 साल में क्या बदलाव आए या पहले स्थिति क्या थी ? अब क्या है ? जिसका अध्ययन और शोध वैज्ञानिक तरीके से करवाए इस रिपोर्ट को संसद की पटल रख जाए इस रिपोर्ट पर संसद और सांसद बाहर वृहद स्तर पर पर चर्चा की जाए उसके आधार पर भविष्य की नीति बनाई जाए । चर्च और भारत के अंदर बैठे चर्च के एजेंटों ने बड़े सुनियोजित तरीके इससे देश में जातिगत प्रतिनिधित्व देने के नाम पर और अस्पृश्यता निवारण के नाम पर एससी एसटी ओबीसी समुदाय को हिंदू समाज को विभाजित करने का प्रयास किया गया जिससे हिंदू समाज को जातियों विभाजित करके ईसाईकरण इस्लामीकरण के एजेंडे को बढ़ावा दिया गया और भारत की राजसत्ता को से हमेशा अस्थिर रखने का प्रयास किया गया जिसका फायदा आज भी राष्ट्र विरोधी शक्तियां उठा लेती 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव और 2024 के विधानसभा चुनाव स्पष्ट रूप से दिखा गया एक अफवाह फैला दी गई बीजेपी सत्ता आएगी आरक्षण खत्म कर देगी इस अफवाह कारण बीजेपी को कम से कम 100 सीट नुकसान हो गया भारत विरोधी राष्ट्र विरोधी शक्तियो का काम भी आसान हो गया भारत विरोधी राष्ट्र विरोधी शक्तियां कमजोर सरकार चाहती जिससे अपने एजेंडो को आसानी पूरा किया जा सके इन राष्ट्र विरोधी हिंदू विरोधी शक्तियों का दमन करने के लिए एक वृहद हिंदू एकता स्थापित करने के लिए सरकार को जातियों के बीच आपसी मतभेद खत्म करने के लिए बड़े प्रयास करने होंगे हिन्दू समाज SC ST OBC वर्गों में ऐसे विभाजित रहा तो राष्ट्र एकता अखंडता अक्षुण्ण बनाए रखना सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती सिद्ध होने वाली है। इन चुनौतियों से कैसे पार पाया जा सकता सरकार और संगठन को विचार करना चाहिए है । आज समय कल ऐसा अवसर दोबारा नहीं मिलेगा लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई सरकार स्थाई नहीं रह सकती जनता छोटे छोटे मुद्दो पर नाराज़ होकर सरकार बदल देती है सरकार और संगठन ने छोटी छोटी गलतियों से सबक नहीं लिया तो बहुत मुश्किल हो जाएगी।
दीपक कुमार द्विवेदी
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