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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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लोकतंत्र की आड में अमेरिका और यूरोप की लूट अब कुछ ही समय की मेहमान है । नाइजर के बाद गोबन ने लोकतंत्र की g पर लात मार दी है । गोबान और नाइजर को लोकतंत्र की आड में फ्रांस ने जमकर लूटा । यह दोनों देश में प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है जिस पर लोकतंत्र के नाम पर फ्रांस अपनी सरकार बनवा देता था । इन देशों के नेता अपने देश को लूटकर लूट का धन फ्रांस में जमा करवा देते थे और सारी बड़ी खदानों के ठेके फ्रांस की कंपनियों को दे देते थे । इतनी धन संपदा होने के बावजूद भी यहां के लोग गरीब हैं ।
लोकतंत्र में अमेरिका ,यूरोप द्वारा अपनी मर्जी की सरकार बनवाना बहुत सरल है ।उदहारण के लिए यूक्रेन में जलेंस्की को अमेरिका ने लोकतंत्र के माध्यम से प्रधान मंत्री बनवा दिया उसके बाद यूक्रेन की नीति अमेरिका तय करने लगा । आज यूक्रेन की क्या हालत है सबको मालूम है ।
अमेरिका यूरोप को लोकतंत्र में सरकार बदलने में भी बहुत आसानी होती है । अगर कोई प्रधानमंत्री इनकी बात नहीं मानता तो यह किसी मियां लॉर्ड को पैसा देकर उसके विरुद्ध फैसला करवा देते हैं या स्विस बैंक्स की लिस्ट या पनामा पेपर में उसका नाम डलवा देते हैं । उदहारण के लिए पाकिस्तान में इमरान खान के विरुद्ध एक टुच्चा सा केस चलवा कर उसे सता से बाहर कर दिया क्योंकि इमरान अमेरिका के स्थान पर रूस के ग्रुप में जा रहा था ।
जो प्रधान मंत्री इनकी बात मानता रहता है उसके लिए इन्होंने फर्जी इनाम आदि बना रखें हैं ।
इसलिए अमेरिका और यूरोप हर समय लोकतंत्र की दुहाई देते रहते हैं । इसीलिए अंग्रेज जाते हुए भारत को लोकतंत्र का फर्जीवाड़ा दे गया। यह सोचने वाली बात है कि कोई दुश्मन हमारा भला कैसे चाहेगा ।।
फ्रांस के प्रधानमंत्री को यह बात समझ आ चुकी है कि अमेरिका और यूरोप की लूट बहुत देर तक नहीं चलेगी। मैक्रॉन ने बयान दिया है कि अफ्रीका के बहुत से देश लोकतंत्र को लात मारकर रूस के ग्रुप में जा रहें हैं जिससे अमेरिका और फ्रांस की लूट बंद हो रही है जिससे अमेरिका और यूरोप में महंगाई चरम पर है क्योंकि पहले यह लोग अफ्रीका ,एशिया को लूट कर अपने देशों में चीज़े सस्ती रखते थे ।
अगर पुतिन ऐसे ही डटा रहा तो हो सकता है अमेरिका और यूरोप में भी लोग सड़कों पर उतर आए ।
भारत में भी धेमहीन लोकतंत्र की जगह धर्म युक्त राजतंत्र को वापिस लाना चाहिए ।नहीं तो भारत में भी धर्म समाप्त हो जायेगा।
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