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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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सोशल मीडिया में सचमुच बांग्लादेश की घटनाओं से दुखी बहुत सारे हिंदुओं की पोस्ट आ रही है ।
वे दुखी हैं,द्रवित हैं ,तड़प रहे हैं।
उन्हें बहुत गहरी पीड़ा है बांग्लादेश के हिंदुओं के उत्पीड़न से।
परंतु वे जो अपील कर रहे हैं वह इतनी चिंताजनक है कि लगता है कि वह आधे मुसलमान हो चुके हैं ।
वह कह रहे हैं कि हिंदू जन, जाति भुलाकर एक हो जाओ ।
यानी इस समय भी उन्हें केवल जाति पर चोट देने की पड़ी है।
जाति को बिना भुलाए हम क्यों नहीं हिन्दुत्व की प्रचण्ड अनुभूति कर सकते।
मैं अपनी जाति को स्मरण करता हूं तो इसलिए मैं किसी अन्य जाति के हिंदू की पीड़ा से द्रवित नहीं होऊगा,
यह विचार ही इतना गंदा और घिनौना है कि इसको बकने वालों को कुछ होश नहीं रहता।
जाति ने ही आज तक हिंदुओं को एक रखा है।
जाति यानी कुल ही समाज की आधारभूत इकाई है ।
जाति भुला दो यानी अपने कुल का गौरव भुला दो ।
जो कुल का गौरव भुला देगा वह हिंदुत्व का गौरव :यह शब्द भर किसी नेता के इशारे पर बोलेगा ,
पर उसके मन में हिंदुत्व का कोई गौरव नहीं रहेगा।
जो लोग भी जाति भुलाने के लिए इतने उतावले हो रहे हैं कि उन्हें इसका अर्थ नहीं दिखता,
वह बुद्धि से अंधे हो चुके हैं औरदिमाग से आधे मुसलमान हो चुके हैं ।
हम देखते हैं कई आर्य समाज के लोग भी ऐसे हैं।अधिकांश आर्य समाजी तो सच्चे हैं और सचमुच वैदिक धर्म के अनुयाई हैं लेकिन कुछ आर्य समाज मेंभी ऐसे लोगहैं जो आधे मुसलमान बुद्धि हो चुके हैं दिमाग से । लगभग उन्माद की हद तक मूर्ति पूजा के विरोधी और दिन रात हिंदुओं के दोष निकालते रहते हैं ।
जो भी हिंदुओं के केवल दोष देखता है,
संकट के समय भी जिसको हिंदुओं के दोष ही याद आते हैं,
इतना ही नहीं ,
हिंदुओं का स्वाभाविक गुण अपने कुल का गौरव और अपनी जाति का गौरव जिन्हें हर बात में बाधा नजर आता है वह चित्त से मुसलमान और ईसाई हो चुके हैं और उनकी अपील या तो बेअसर रहेगी या उल्टा असर डालेगी।
आपको अपने जैसा ही अन्य हिंदुओं को भी मानना चाहिए ।
जो भी आदमी यह कहता है कि हिंदुओ, जाति को भूलकर एक हो जाओ,
वह अपनी जाति को बहुत ज्यादा याद कर रहा है, उसके मन में जाति छाई हुई है और उसे हिंदुओं पर विश्वास नहीं है कि वह जाति का गौरव रखते हुए भी हिंदू हो सकते हैं और हिंदू समाज से आत्मीयता रख सकते हैं।
उसे संपूर्ण भारतीय इतिहास का कोई ज्ञान नहीं।
वह वज्र मूर्ख है और आधा मुस्लिम और आधा इसाई हो चुका है।
मुसलमान और अंग्रेजों का साथ दिया ही उन लोगों ने शुरू में जो अपनी जाति का दबाव भूलकर या जाति के दबाव से भाग कर कभी मुसलमान के साथ हो गए और कभी अंग्रेजों के साथ।
जो लोग जाति के अनुशासन में थे, वे आज तक मुसलमान या ईसाई नही हुए हैं।यह सदा स्मरण रखना चाहिए।
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