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लोकसभा चुनाव २०२४ में उत्तर प्रदेश प्रदेश में भाजपा की हार के वैसे तो बहुत से कारण हैं पर उन कारणों में से एक बड़ा कारण पेपर लीक भी है

लोकसभा चुनाव २०२४ में उत्तर प्रदेश प्रदेश में भाजपा की हार के वैसे तो बहुत से कारण हैं पर उन कारणों में से एक बड़ा कारण पेपर लीक भी है , उत्तर प्रदेश की पुलिस भर्ती में हुआ पेपर लीक वैसे कोई नई बात नहीं है धीरे धीरे देश भर के तमाम राज्यों की विभिन्न परीक्षाओं में होने बाला पेपर लीक हमारे जीवन का हिस्सा सा बन गया है , पर मुझे ख़ुशी है इस बार नीट की परीक्षा में हुआ पेपर लीक का मुद्दा इस बार राष्ट्र व्यापी बन गया है , मोदी सरकार ने पहले ही संसद में पेपर लीक पर कठोर क़ानून बना दिया था साथ ही नीट की परीक्षा में हुए पेपर लीक की CBI जाँच के बाद अब तक देश भर में कई महत्वपूर्ण गिरफ़्तारियाँ भी जारी हैं , आख़िर क्या कारण है बार बार ऐसी घटनाएँ हमारे सामने आती हैं ? और इनके आगे हमारा सिस्टम बेबस नज़र आता है , इसके लिए हमे स्वयं को महसूस कर समझना होगा , अंग्रेज हमारे देश को छोड़ कर चले गये किन्तु भ्रष्टाचार को हमारी जड़ों में छोड़ गए और यह धीरे धीरे ये हमारे समाज का हिस्सा बन गया , और फिर हमारे देश के राज नेताओं के संरक्षण में ये भ्रष्टाचार हमारी शिक्षा व्यवस्था में भी घुस गया और हमारी शिक्षा व्यवस्था को ही पूरी तरह चौपट कर दिया स्कूल कालेज कोचिंग सेण्टरों की बनी बड़ी बड़ी इमारतों ने शिक्षा को पूरी तरह व्यापार में बदल दिया , पूरे देश में खासकर UP बिहार में कुछ राजनीतिक दलों और भ्रष्ट नेताओं के संरक्षण में हाई स्कूल और इंटर जैसी परीक्षाओं में नक़ल को संस्थागत रूप दे दिया गया और धीरे धीरे हमारे समाज ने भी इसे स्वीकार कर लिया , अब जिसकी पढ़ाई की शुरुआत ही बेईमानी अर्थात् नक़ल से हुई हो और वो आगे किसी पद पर पहुँच जाता है तो उससे नैतिकता की उम्मीद भी बेईमानी ही है , आचार्य चाणक्य ने कहा था कि जिस राष्ट्र की शिक्षा मुद्राओं से बिकने लगे उसकी बर्बादी तय है , हमारे देश में दशकों से यही चल रहा है शिक्षा बिक रही है लोग धन से डिग्रियाँ ख़रीद रहे हैं , हाई स्कूल इंटर नक़ल से पास कर रुपयों की दम पर बड़े कालेजों में दाखिला और धन से डिग्री तो प्राप्त हो जाती है किंतु ये बिना पढ़े नकल से पास हुए और नोटों से डिग्री हासिल किए लोग जब नौकरी या प्रतियोगी परीक्षा में जाते हैं तो सहारा केबल पेपर लीक का ही होता है इनके पास रुपया होता है और उस रुपए के लालच में सिस्टम के अंदर के कई लोग इन जैसे लोगों की मदद करते हैं और फिर ये लोग हमारे सिस्टम को दल दल में और धँसा देते हैं , और इस पूरे सिस्टम का खमियाज़ा हमारे देश के कमजोर और गरीब तबके के छात्रों को झेलना होता है यही कारण है ग़रीब ग़रीब ही रह जाता है हमारा सिस्टम उसके हिस्से की नौकरी या डिग्री को निगल जाता है आरक्षण का लाभ भी इन नक़ल माफियाओं के कारण से उन नकलची बेईमानों को ही मिलता है ।
ऐसा नहीं है कि इसको समाप्त नहीं किया जा सकता ? इसके लिए मजबूत इक्षा शक्ति के साथ ही विपक्ष के समर्थन की भी आवश्यकता है , मुझे ख़ुशी है इस बार जब पेपर लीक का मुद्दा राष्ट्रव्यापी बना है तो वो तमाम राजनीतिक दल जो इस भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था को संरक्षण देते रहे हैं आज वो भी पेपर लीक पर सबाल उठा रहे हैं , मुझे ध्यान में आता जब मैं कक्षा ४-५ का छात्र था तब श्री मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री थे उस समय उनका एक समाचार पत्र में कार्टून छपा था जिसमें वो हाथ में झाड़ू पकड़े थे और नीचे A,B,C,D जैसे अक्षर पड़े थे मतलब वो उस समय अंग्रेज़ी और कंप्यूटर का विरोध करते थे जिस कारण से मेरे समय के मेरे जैसे आम लोगों की प्राथमिक शिक्षा में अंग्रेज़ी और कंप्यूटर न होने से हम लोग इस शिक्षा से वंचित रह गये दूसरी और उसी समय पर उन्होंने अपने लड़के श्री अखिलेश यादव जी को पढ़ने के लिए उत्तर प्रदेश के बाहर राजस्थान के धौल पुर के इंग्लिश मीडियम स्कूल में भेज दिया और उसके बाद सभी लोग जानते हैं कि अखिलेश जी भारत के बाहर आस्ट्रेलिया पढ़ने चले गये और उनके भतीजे मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप जी भी ७ समुंदर पार हावर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ कर आये हैं लेकिन दूसरी ओर अपने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को ही ध्वस्त कर हम जैसे अनेकों आम जनों का जीवन बर्बाद करने में लगे थे क्योंकि हम लोगों के यहाँ न तो बड़े इंगलिश स्कूल ही थे और न ही विदेश जा कर पढ़ने की हमारे लोगों की छमता थी , मुझे आज भी ध्यान है १९९१ में पूज्य बाबू कल्याण सिंह की उत्तर प्रदेश में सरकार बनते ही नक़ल अध्यादेश लागू कर दिया गया था जिस कारण से नकलचियों और और नकल माफियाओं में गजब का भय व्याप्त हो गया था लेकिन इसका समर्थन तो छोड़ो मुलायम सिंह जी ने विरोध कर दिया और घोषणा की कि हमारी सरकार बनते ही हम इस अध्यादेश को समाप्त कर देगें और फिर जब १९९३ में उनकी सरकार बनते ही अध्यादेश समाप्त हुआ 👇🏿परीक्षा स्वकेंद्र हो गई नकल माफियाओं को मिले इस जबरदस्त समर्थन के बाद तो ऐसा नकल का नंगा नाच हुआ कि उत्तर बोर्ड पर लिख दिये जाते थे यदि पढ़ कर लिखना नहीं आता तो कापी कोई और लिख देता था कहीं कहीं तो परीक्षार्थियों को आने की भी आवश्यकता नहीं होती थी मार्कशीट फर्स्ट डिवीजन पास की उनके घर पहुँच जाती थी , और जब आस्ट्रेलिया से पढ़ कर आये अखिलेश जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो भी यही सब जारी रहा और इतना ही नहीं उनका एक बेशर्म बयान कि नकल कौन नहीं करता थोड़ी बहुत बेईमानी परीक्षा में चलती ही है सभ्य समाज इस बयान को कैसे बर्दाश्त कर सकता है ?जबकि उनकी बेटी खुद लंदन से पढ़ी है जिसका एडमिशन वो स्वयं कराने गये थे और आज जब जनता के दबाव में यही लोग समर्थन कर रहे हैं इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ तो मुझे भरोसा है जिस प्रकार से पिछले १० वर्षों में ख़ासकर भाजपा शासित राज्यों में आतंकी माफिया समाप्त हो गये भू माफियाओं पे कार्यवाही जारी है अब इन शिक्षा माफियाओं की बारी है क्योंकि मोदी जी के पास इसे समाप्त करने की मज़बूत इक्षा शक्ति भी है और जनता के दबाव में विपक्ष का समर्थन भी और अब तो मजबूत क़ानून भी है देखते जाइए अब इन शिक्षा माफियाओं की खैर नहीं और ये पेपर लीक जैसी बिसंगतियाँ भूली बिसरी यादों में ही रह जायेंगी ।


सुब्रत पाठक जी 
पूर्व लोकसभा सांसद कन्नौज 
उत्तर प्रदेश बीजेपी के पूर्व महासचिव 
उत्तर प्रदेश बीजेपी युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष 

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