सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

भूतकाल की बातों पर रोना निरर्थक क्यो है?

भूतकाल की बातों पर रोना निरर्थक है, और बार बार यह कहकर संतोष कर लेना की हिंदू संस्कृति बहुत मजबूत एवं अच्छी है, हिंदू समाज भुलावे में है।
यदि हिंदू समाज को जिंदा रहना है और ऐसी सुंदर, सब धर्मो के साथ सद्वयोहार रखने वाली संस्कृति को बचाना है तो,
हिंदू समाज की सभी जातियों एससी, एसटी , ओबीसी, सामान्य वर्ग सबको एक साथ आना पड़ेगा।
यह कार्य करने की जिम्मेदारी, अपर कास्ट के लोग, धर्माचार्यों, मठाधीशों, शंकराचार्यों, समाज के बुद्धि जीवी लोगों का है। सबको साथ बैठ कर, विचार करके एक संयुक्त संस्था का निर्माण करना चाहिए, जिसकी कार्य सूची एवं व्यूह रचना निश्चित हो।
आने वाले पांच वर्ष में घर घर जाकर समाज के सभी वर्गों को एक छत्र के नीचे लाया जाय, तभी हिंदू समाज एवं संस्कृति को बचाया जा सकता हैं, नहीं तो 2050 तक धर्म , संस्कृति एवं भारत का तथाकथित लोकतंत्र विलुप्त हो जायगा। हिंदू, जागो, जागो। जय श्री राम।

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