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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रत्येक मुसलमान का फ़िलिस्तीन से लेना देना है क्योंकि इस्लाम में राष्ट्र जैसी किसी अवधारणा को वास्तव में कोई मान्यता नहीं है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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इस्लाम एक वैश्विक क़ौम है, यदि वह इस्लाम को ठीक से मानते हैं तो वह भारत के, नेपाल के, बँगलादेश के मुसलमान हों सकते हैं लेकिन वह भारतीय, नेपाली अथवा बँगलादेशी नहीं हो सकते।
यदि इस्लाम को पूरी तरह से मानने वाला व्यक्ति ख़ुद को भारतीय अथवा किसी अन्य देश की पहचान के साथ प्राथमिकता से जोड़ने की बात करता है, तो वह या तो झूठ बोल रहा होता है अथवा तकनीकी तौर पर ऐसा करना उसकी मज़बूरी होती है।
यह बात अलग है कि इस तरह का सिद्धांत प्रकृति विरोधी है। चाहे ईसाई हों अथवा मुसलमान, कोई भी हो, आज तक किसी ने दुनिया में ऐसे राष्ट्र की स्थापना नहीं की है जहां दुनिया के सारे मुसलमान अथवा सारे ईसाई एक साथ एक शासन के नीचे राज कर पाये हों। हिंदू और यहूदी ऐसा थोड़ा बहुत करते दिख जाते हैं, तो यह उनकी मजबूरी है, विकल्प नहीं।
सही बात तो ये है कि राष्ट्र की कल्पना का अभाव प्रकृति विरोधी सिद्धांत है, लेकिन यह बात भी उतनी ही सही है कि इस्लाम के भीतर राष्ट्र के महत्व को इंगित न करना भी अप्राकृतिक व्यवस्था है। इसी कारण इस्लाम के नाम पर बना पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान कुछ ही दशकों में टूट गया।
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