सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

ईसाईयों मिशनरियों के एजेंडे के तहत तथाकथित धर्मगुरु प्रेमानन्द ने माता काली पर अभद्र टिप्पणी की है जानने के लिए पढ़ें पूरा आलेख

जब भारत में ईसाई मिशनरियों द्वारा मूर्ती_पूजा को पाखंड प्रसारित किया जा रहा था । जब भारत का हिन्दू वर्ग नास्तिकता के चपेट में आ रहा था । तब स्वामी रामकृष्ण_परमहंस जी घंटो बैठकर माता  काली से वार्तालाप करते थें। 

रामकृष्ण परमहंस जी, वामाखेपा जी और भक्त रामदास जी के लिए वात्सल्य के अतिरके से विभूषित माता #काली प्रत्यक्ष प्रकट होकर #प्रेम करती थीं। जैसे माँ अबोध बालक के पीछे चलती हैं इस डर से कि कहीं चलते हुए यह गिर न जाए य चोंट न लगवा ले उसी तरह माता महाकाली मातृभाव के अतिरके से भक्त #रामदास जी के पीछे चलती थीं ।

जिन #तुलसीदास जी के लिए राम जी बालक राम बनकर आए और बाबा कहकर उनसे #चित्रकूट में चंदन लगवाए,जिन #सूरदास जी के लिए कृष्ण जी बालक कृष्ण बनकर आतें थें और सूरदास जी #कन्हाई कहकर उन्हें अपने पद सुनाते थें । जिन #वामा_खेपा के जूठन को ही माता काली भोग के रूप में ग्रहण करती थीं । 

आज वर्तमान परिपेक्ष्य में ऐसे महान भक्तों की अवहेलना करके धर्म और समाज का बंटाधार करने वाले छद्म साधु मीडिया और राजनेताओं द्वारा स्थापित होकर हिंदुओ को नास्तिकता के उस शिखर पर ले जाने में तुले हैं जहाँ हिन्दू #व्यक्तिवाद के आवेश में आकर अपने समस्त सनातन मानबिन्दुओं का स्वतः नाश करके धर्म को #विखंडित करने को आतुर है। 

विचार कीजिये भारत में #रामकृष्ण_परमहंस जी जैसे भगवद्भक्त के इष्ट का अपमान होना मात्र क्या संयोग है ❓. मिशनरियों के मन मे कहीं न कहीं वह कसक है कि अगर रामकृष्ण परमहंस जी न होते तो आज भारत मे बड़ा वर्ग हिन्दू न होकर ईसाई होता । 

अंततः भारत को तोड़ना मिशनरी बखूबी जानते हैं , अतः उनके फेंके हुए पासे को उठाकर स्वयं का और धर्म का नाश न करें। 

जय_श्री_राम 🚩🚩

श्रीयुत सांकृत्यान 🚩🚩

टिप्पणियाँ

  1. Hame pata nhi premanand ji ne kis sandarbh me kaha par ye saty hai ki Shri radhe Rani satoguni Prem samarpan alokik sadhana ki Devi hai wo Prem Jo lokik hote hue parlokik Prem hai jaha vrindavan Jane ke baad har jeev estree hokar Shri Krishna ka Prem pana chahta hai. swam Radha Rani bhi vivahit thi. Bat jab Mata Kali Devi ki aati hai toh wo tamoguni rajoguni tamsi Devi hai unki Pooja ya to tantrik karte hai ya jhad fook Wale log sadharan log kabhi nahi aur jo sadharan log karte hai nuksan awashya uthate hai

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    1. काली जी तमोगुणी हैं, शिव जी तमोगुणी हैं आदि आडंबर फैलाए गए हैं। रही बात काली जी के पूजने की तो वृज की अधिष्ठात्री देवी कात्यानी जी काली जी का ही स्वरूप हैं । स्वयं भगवान राम माता तारा(काली) के उपासक थें । भगवान राम की कुलदेवी भी माता काली ही हैं। माता काली परमात्मा की संहारक शक्ति हैं । तत्वतः सभी भगवदस्वरूप एक ही हैं। कृष्ण काली,राम तारा सब एक हैं।

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