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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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1.धर्मनिष्ठ
2. अधर्मनिष्ठ
3.प्रमादनिष्ठ
१.धर्मनिष्ठ हिंदू
धर्मनिष्ठ हिंदू वह जो सनातन वैदिक धर्म एवं वर्णाश्रम व्यवस्था को मानता है । धर्म के बताए 10 लक्षणों का नियम पूर्वक पालन करता है अर्थात धर्म को अपने में धारण करता है वही धर्मनिष्ठ हिंदू हैं। धर्मनिष्ठ हिंदू नास्तिक भी हो सकता है लेकिन जो मूल चार्वाक दर्शन को मानता हो लेकिन उसमें आब्रहिमक विचारधारा का प्रभाव न के बराबर हो।
२.अधर्मनिष्ठ हिंदू
अधर्मनिष्ठ हिंदू को पहचानने के लिए महाभारत का एक उदाहरण देता हूं महाभारत में पंडाव और कौरव परिवार के थे लेकिन पांडव धर्म के पक्ष में थे कौरव अधर्म के पक्ष में थे । उसी प्रकार हिन्दू समाज एक वर्ग धर्म के पक्ष में एक वर्ग अधर्म के पक्ष में है। कम्युनिस्ट सोशलिस्ट आब्रहिमक विचारधारा से प्रभावित नास्तिक कुंठित जातिगत समूह उपभोक्तावादी भौतिकतावादी और मूल परंपराओं को न मानने वाला राष्ट्रवादी हिंदू जो सनातन धर्म को राष्ट्रधर्म नहीं मानता है वो चाहे अपने को राष्ट्रवादी ही कहे लेकिन धर्मनिष्ठ हिंदू नहीं है ।
३.प्रमादनिष्ठ हिंदू
यह हिंदू समाज की वह श्रेणी जिसे धर्म संस्कृति सभ्यता राष्ट्र से किसी प्रकार कोई मतलब नहीं है उसे सिर्फ अपने स्वार्थ निजी हित लाभ से मतलब है ।
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