सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

धर्म की पुनः स्थापना करना है और इस धरा को म्लेच्छों से मुक्त करना है तो हम सनातनियों को क्या दो संकल्प लेने चाहिए?

धर्म की पुनः स्थापना करना है और इस धरा को म्लेच्छों से मुक्त करना है तो हम सनातनियों को एक संकल्प लेना चाहिए एक दिन हम अखंड भारत में मिलेंगे जब तक इस धरा को म्लेच्छों से मुक्त नहीं कर देंगे हम चैन से नहीं बैठेंगे चाहे इस संकल्प पूरा करने हजारों वर्ष लग जाए तब तक इस संकल्प को दोहराते रहेंगे।इस संकल्प को बार बार दोहराते रहेंगे एक दिन ऐसा अवसर आएगा अखंड भारत का स्वप्न भी पूर्ण हो जाएगा और धरा भी म्लेच्छ से मुक्त हो जाएगी ।

मै ने अखंड भारत संकल्प दिवस के अवसर पर संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी का बौद्धिक सुना था। उन्होंने यहूदियों को लेकर एक रोचक कहानी हम लोगों को सुनाई थी। यहूदी लोग को 3 हजार वर्ष पहले उन्हें अपने मूल स्थान येरूशलम पलायन करना पड़ा था । लेकिन यहूदियों ने हार नहीं मानी थी जब कोई शुभ अवसर पर यहूदी लोगों सामूहिक रूप से मिलते थे वह एक संकल्प लेते एक दिन येरूशलम मिलेंगे उन्होंने इस संकल्प बार बार दोहराते कई पीढ़ियां गुजर गई फिर अपने संकल्प नहीं भूले एक दिन येरूशलम को उन्होंने प्राप्त किया अपना एक देश बनाया। क्या हिन्दू यह संकल्प नहीं ले सकता है कि जितनी पीढ़ियां गुज़र जाए फिर भी हम एक दिन अखंड भारत में मिलेंगे जब तक यह धरा म्लेच्छ मुक्त नहीं हो जाएंगी एक भी दिन शांत नहीं बैठेंगे कभी नहीं कभी इस संघर्ष में हमे विजय प्राप्त होगी । वोट देने सरकार बदलने से सबकुछ नहीं मिलता उसके लिए सबकुछ खोना पड़ता है । हिंदू समाज यह सोच रहा बिना कुछ किए हमे सबकुछ मिल जाएगा यह संभव नहीं है इसके लिए हम लोगों को अपने स्तर पर समाज के स्तर बहुत बड़ा त्याग करना पड़ेगा तभी अखंड भारत का स्वप्न और म्लेच्छ मुक्त धरा हो पाएगी । 
संघ का एक गीत व्यक्ति व्यक्ति में जगाएं धर्म चेतना जन मन संस्कार करे यही साधना।

मै ने उपर आलेख में दो संकल्प और यहूदियों के 3 हजार वर्ष के संघर्ष कहानी की बात किया हूं। इन दोनों संकल्प और यहूदियों की संघर्ष की कहानी बताने का यह मेरा यह तात्पर्य था । हिंदू समाज के सामने बड़ी से बड़ी घटना घट जाए लेकिन उस घटना को बहुत जल्दी भूल जाता है । राम मंदिर निर्माण अभी दो महीने पहले हुआ था पूरे देश में भव्य कार्यक्रम हुए हर गांव हर शहर में छोटे कार्यक्रम हुए लेकिन जैसे चुनाव शुरू हो गए लोग जाति क्षेत्र भाषा के नाम पर वोट देने की बात करने लगे जो क्षत्रिय समाज भगवान राम वंशज होने का दावा करता है वही समाज भाजपा को सबका सिखाने की बात करने लगता है । यहां तक भाजपा विरूद्ध वोटिंग करता है। कारण हम लोग बड़ी से बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं को भूल जाते हैं । राम राम मंदिर का निर्माण इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। 

हिंदू समाज यह कभी नहीं सोचता भारत का विभाजन क्यों हुआ ? विभाजन कारण क्या थे ? अफगानिस्तान क्यों अलग हुआ ? बंग्लादेश क्यों अलग हुआ ? तिब्बत ब्रह्मदेश हमसे क्यों अलग हुए है? कश्मीरी पंडितों को अपने देश विस्थापित होकर क्यों रहना पड़ रहा है? बंगाल केरल में हिंदूओं पर हमले क्यों हो रहे हैं? इन विषयों पर कभी हिंदू चिंता करते नहीं मिलेगा उसे नीट में परीक्षा में क्या हुआ? लहसुन प्याज के भाव क्यों बढ़ गए ? हमारी जाति को कम मिल रहा है हमारी जाति के साथ अन्याय हो रहा है? ऐसा मुद्दों पर हिन्दू समाज प्रतिक्रिया देता मिलेंगा जो उसके जीवन के अल्पकालिक समय तक प्रभाव रहेगा उसके जीवन इन घटनाओं से कोई लाभ हानि नहीं होगी। लेकिन जिस दिन आज के भारत भू-भाग हाथ निकल गया उस दिन इस दुनिया में हिंदू समाज को कोई भी शरण नहीं देगा क्योंकि जो लोग अपनी मातृभूमि रक्षा नहीं कर पाते दुनिया में कायरों की भांति शरण मांगते हैं उन्हें कोई शरण भी नहीं देगा क्यों जो लड़ सकते वो लोग उन्हें कोई देश क्यों शरण देगा जो जरूरत पड़ने उनका साथ नहीं दे पाएंगे। इसलिए हिंदू समाज को समाज के रूप दो संकल्पों रूप लेने होंगे एक दिन हम अखंड भारत में मिलेंगे जब तक इस धरा म्लेच्छों का मुक्त नहीं करेंगे चैन नहीं बैठेंगे ऐसे संकल्पों अपने बच्चों और परिवार बीच बार बार दोहराएंगे भारत विभाजन क्यों हुआ अफगानिस्तान हमसे अलग क्यों हुआ इसके कारण क्या थे ? तिब्बत ब्रह्मदेश हमसे अलग क्यों हुए इसके कारण क्या थे? म्लेच्छों ने पिछले हजार वर्ष में हमारे साथ क्या अत्याचार किए हैं? फिर भी हमारे पूर्वजों ने सिर काटा दिया फिर सिर नहीं झुकाया इन बातों कहानियों माध्यम से हम बार बार अपने बच्चों के बीच अपने परिवार के बीच यह बातें दोहराते रहेंगे श्रुति परंपरा के माध्यम से हजारों वर्षों हिंदू समाज के मन मस्तिष्क में रहेगी कभी न कभी ऐसा समय आएगा यह धरा म्लेच्छ मुक्त होगी भारत पुनः अखंड होगा। हम लोग अपने इतिहास भूल गए तो एक दिन हम स्वयं इतिहास बन जाएंगे । क्योंकि इतिहास भी अपने को दोहराता इतिहास आपको समाज के रूप में बार बार अवसर नहीं देगा ।

दीपक कुमार द्विवेदी

टिप्पणियाँ