सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

चुनावी_बकलोली 4 जातिगत फूट बनी हार का कारण

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अभी तक बड़े बड़े विद्वानों ने अनालीस कर कर के पूरे पटल को विद्वतापूर्ण लेखों से भर दिया है । किसी भी लेख को पढ़ो तो मुख से तुरंत निकलता है आह दद्दा, वाह दद्दा, सटीक विश्लेषण आदि आदि ।

पर इन सब लेखों में कुछ बाते है जो सबसे ज्यादा कॉमन है ...
1. जातिगत फूट / घमंड / सम्मान आदि
2. योगी जी के 35 एवेंजर्स जिन्हे मोटा भाई ने टिकट नहीं दिया
3. अयोध्या में घरों का टूटना
4. शंकराचार्य जी का श्राप

आदि आदि

इसमें सबसे खास है जाति जो कि जाती नही, न ही वोटर की और न ही विश्लेषक की ।  #जातिविज्ञानी_गिरोह हमेशा की तरह सवर्ण को गरिया रहा है तो शुद्धि समूह पीछडी जातियों को । कोई जाति तो स्वयं ही पड़ी लकड़ी उठाकर कह रही है कि ये हमने किया है और वो भी उस सीट का उदाहरण दे रहे है जहां अब्दुल 50% है ।

ऐसा ही एक लेख पटल पर मैने देखा जिसमे सवर्ण लेखक ने BSP के वोट बैंक पर आरोप लगाया कि वे पहले हमारे साथ आए 2019 में और 2024 में छोड़ गए जिससे हम UP में काफी सीट्स हार गए । अब लेखक ने चूकि 2 टर्म का ही डाटा दिया तो पाठको को असलियत में ऐसा लगा होगा पर ये वास्तव में ये इनफ्रेंस डाटा के हिसाब से भी सही नहीं है । केवल 2019 या 2024 की पारस्परिक तुलना से कोई नतीजा नहीं निकलेगा । उसके लिए कुछ टर्म और पीछे जाना पड़ेगा कि BJP ने 2014 और 19 में किसका वोट बैंक खाया था ?

2019 की माने तो BJP ने 2004 की तुलना में 12% कांग्रेस का, 5%  समाजवादी का और 8% बसपा का वोट शेयर खाया था । जबकि अगर यही तुलना 2014 से की जाए तो पता लगेगा कि 2019 में 4% सपा का और 1% कांग्रेस का खाया, बसपा का वोट वही खड़ा रहा with No change....

2024 में समाजवादी और कांग्रेस ने अपना वोट शेयर वापस छीनते हुए  BJP को  7% का नुकसान दिया तो बसपा को 10% का ।

Data नीचे दिया गया है आप स्वयं अंदाजा लगाइए और बताइए कि क्या कारण रहे होंगे , पर उससे पहले इन चुनावों के परिणामों को जातिगत रंग देना बंद कीजिए । पहले से ही #जातिविज्ञानी_गिरोह ने पटल का माहौल जहरीला बना रक्खा है जिसका असर जमीन पर भी जा रहा है ।

निखिलेश

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