सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी को अपेक्षित सफलता न मिलने के कारणों की गम्भीर समीक्षा और समाधान मेरी नजर में

लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी को अपेक्षित सफलता न मिलने के कारणों की गम्भीर समीक्षा और समाधान मेरी नजर में :
1) बीजेपी के शीर्ष नेताओं द्वारा आरएसएस के सहयोग की उपेक्षा करना
2) यूपी में टिकट वितरण को लेकर योगी जी पसन्द को बीजेपी के शीर्ष नेताओं द्वारा नकारना
3) विरोधियों द्वारा लगाए गए आरोपों ( संविधान और आरक्षण खतरे में )का सही जवाब सही समय पर देने में विलंब करना
4) गुजरात के पुरुषोत्तम रूपाला द्वारा क्षत्रिय समाज पर लगाए आरोपों का न खण्डन करना और न ही टिकट काटना
5) बीजेपी के शीर्ष नेताओं का ओवर कॉन्फिडेंस और कतिपय अहंकार प्रदर्शित करना
6) विधर्मियों की अपेक्षा कुछ जगहों पर सनातनियों द्वारा वोट डालने में कम रुचि लेना
7)बीजेपी के शीर्ष नेताओं द्वारा व्यापार के क्षेत्र में लोकल की जगह गुजरातियों को प्रश्रय देना
8) विधर्मियों को अपना बनाने/मानने की भूल
9)जमीनी स्तर पर जुड़े कार्यकर्ताओं की जगह हवा - हवाई कार्यकर्ताओं को सुनना
10)बीजेपी के शीर्ष नेताओं का आत्ममुग्धता का शिकार होना
11) कॉरपोरेट और बैंकिंग सेक्टर की मनमानियों पर पूरी तरह से अंकुश ना लगा पाना
12) फार्मर्स रिफार्म बिल पर सही समय पर एक्शन न ले पाना ( काश ! 2019 से 2024 के बीच इसका समाधान निकला होता )
13)बीजेपी के शीर्ष और लोकल नेताओं द्वारा विधर्मियों की चाटुकारिता और तुष्टिकरण की नीति विरुद्ध बीजेपी के कोर वोटरों की नाराजगी
14) बेरोजगारी दूर करने का कोई सही रोडमैप जनता के बीच सही ढंग से प्रस्तुत करने में विफलता
15) वोटरों की मानसिकता पढ़ने में विफल होना (वोटर्स आपकी जीत के साथ आपको थोड़ा - बहुत सबक सिखाने के मूड में आ गए थे ) 
16)लाभार्थी योजना के अंतर्गत केवल पुरानी योजनाओं की ही चर्चा करना (जबकि कतिपय जनता नई लोकलुभावन योजना की घोषणा सुनने की आशा में थी)
17) कतिपय क्षतिग्रस्त मामलों की रिपेयरिंग करने में आपके आईटी सेल  नाकामी
18) बीजेपी के सांसदों और जनता के बीच जनसंवाद की कमी 
19) कुछ क्षेत्रों में आपके कोर वोटरों की नाराजगी को पढ़ने में लोकल नेताओं की नाकामी
20) कतिपय जगहों पर लोकल सांसदों की जगह पीएम चेहरे पर वोट पड़ना ( लोकल सांसदों की नाकामी )
21) कतिपय मीडिया द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से दिए जा रहे संदेशों की अनदेखी करना और वाशिंग मशीन वाली थ्योरी को बल देना
22) जनता के सेंटीमेंट को हर्ट करने वाले सांसदों/ लोकल नेताओं के विरुद्ध कोई त्वरित एक्शन न लेना
23) विकास के प्रति अपेक्षित विश्वास पैदा करने में विफलता
24)कतिपय मामलों में देश के शीर्ष अदालत का अप्रत्याशित व्यवहार ।
समाधान :
किसी भी शर्त पर हिन्दुओं को न कोसें, क्योंकि आपको मिलने वाले सीट्स प्रायः इन्हीं हिंदुओं की वजह से है । भूलकर भी अयोध्यावासियों को छेड़ें नहीं , बल्कि शान्त और शीतल मस्तिष्क से इसपर गहन चिंतन करें । बेरोजगारी दूर करने के लिए एक सही रोडमैप तैयार करें । लाभार्थी योजना पर पुनर्विचार कर आवश्यक संशोधन करें । व्यर्थ के भ्रम ( विधर्मियों के तुष्टिकरण ) में ना पड़ें , क्योंकि वाजपेयी जी ने जहां शिया मुस्लिमों को संतुष्ट करने /अपना मानने के चक्कर में अपना कबाड़ा किया , वहीं आप पसमांदा मुस्लिम को खुश करने/अपना मानने की नीति पर आ गए और आपके कोर वोटर्स इसे बहुत गहराई से महसूस कर रहे थे । कृपया अधिकांश भारतीय मुस्लिम समाज का सनातनियों के प्रति व्यवहार का समग्र इतिहास पढ़ लीजिए । आप बीजेपी के कोर एजेंडे से अलग हटकर अपनी नई कहानी लिखने की कोशिश न करिए। कम से कम हर तीन महीने पर आपके जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले प्रबुद्ध वर्ग की गम्भीरता से समीक्षा कर उसपर अमल करिए । ज्ञानवापी , मथुरा जैसे मुद्दों को और गति दें ।भ्रष्टाचार पर और कठोर कार्यवाही करें । वाशिंग मशीन वाली थ्योरी को तिलांजलि दें । अग्निवीर योजना को और भी प्रभावी बनावें। सामरिक क्षेत्र पर चल रही योजना को और धार दें ।विदेश नीति पूर्ववत प्रभावी रखें ।शिक्षा , चिकित्सा और तकनीकी क्षेत्र को ज्यादा प्रभावी और उपयोगी बनावेँ । हर वर्ष विकास का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करने की जगह हर तीन माह में ही रिपोर्ट कार्ड जनता के बीच प्रस्तुत करें और जनता से मिल रहे फीडबैक की गंभीरतापूर्वक समीक्षा कर आवश्यक संशोधन भी करें । नीति आयोग को दीर्घकालिक स्पष्ट और इको - फ्रैंडली योजना बनाने जा निर्देश दें । अपनी कोर कमिटी के अतिरिक्त जमीनी स्तर को समझने वाले हर क्षेत्र के प्रबुद्ध और राष्ट्रवादी लोगों की एक स्वतंत्र कमिटी भी होनी चाहिए । यथावश्यक समन्वयवादी नीति को अन्तिम रूप से स्वीकृति मिलनी चाहिए । टैक्स - स्लैब ऐसा हो कि आपका सकल घरेलू उत्पाद भी प्रभावित न हो और जनता /व्यापारियों को भी अतिरिक्त भार न लगे । कानून के पालन के मामले में और कड़ाई बरतें । आवश्यकता हो तो कुछ राज्यों पर प्रशासन तात्कालिक रूप से सैन्य अधिकारियों और लोकल प्रशासन के के संयुक्त तत्वावधान में दे दें । सुलझी मानसिकता वाले सैन्य अधिकारी इसकी जिम्मेदारी लें ।न्यायालय के अतिरिक्त दवाब में ना आएं ।विधायिका ,कार्यपालिका और न्यायपालिका एक अतिरिक्त को - ऑर्डिनेशन बना कर रखें । लोकतन्त्र को कमजोर करने वाली हर विरोधी शक्ति पर कड़ाई से प्रहार करे । कुछ उद्योग - धंधे स्थापित करने में वैज्ञानिकता के साथ - साथ पर्यावरण के हित का भी ध्यान रखें । राष्ट्र की आन्तरिक और वाह्य सुरक्षा से कोई समझौता न करें । 
याद रखें --- स्वतंत्र रूप में हमारी पहचान की अपेक्षा राष्ट्रीय रूप से हमारी पहचान ज्यादा महत्वपूर्ण है ।
अंततः वोटरों की नाराजगी के जायज कारणों को जानकर उन्हें दूर करें और उन्हें अपने विश्वास में लें।

नोट : अगर इस्के अलावे कोई अन्य कारण/सुझाव नजर आए तो राष्ट्रहित में अवश्य प्रेषित करें।

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