सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

हिंदू धर्म में सोलह संस्कारों में विवाह संस्कार महत्वपूर्ण क्यों है?

                      कर्त्तव्य की पूर्ति को सुचारू बनाये रखने के लिए दायित्वों का विभाजन "घर-संसार" के रूप में जब किया जाता है, तब स्त्री और पुरुष युगल की आवश्यकता प्रतीत होती है। क्योंकि #घर सम्बद्ध अभीष्ट कर्त्तव्यों का निर्वाह #स्त्रैण_स्वभाव(स्त्री) की अपेक्षा करता है। वही #संसार सम्बद्ध अभीष्ट कर्तव्यों का निर्वाह #सङ्कल्प_स्वभाव(पुरुष) की।
इसलिए जीवनचर्या सुचारू रूप से क्रियान्वित होता रहे, यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि, एक #परिवार के निर्माण में दोनों ही #घटकों की अनिवार्य उपस्थिति बनी रहे। और इस शर्त को पूरा करने के लिए व्यवहार में #विवाह_परम्परा का ज्ञान होता है।
विवाह संस्कार का मूल उद्देश्य ही "अभीष्ट प्रयोजन का प्रतिपादन करना है" न कि #भोग_विलास। 
इसलिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि,
विवाह के लिए जो भी "विधि-निषेध" बनाये जायें, एक चिरकालिक व्यवस्था को स्थापित करने वाले हों। न कि अल्पकालिक व्यवस्था को देने वाले।
इसी को आलम्ब करके, विवाह के छः प्रकार महाराज मनु ने बताए। वैसे वर्त्तमान समाज शास्त्र विवाह की कुल 18 परम्परा को बताता है।
जिनमें #श्रेष्ठताभाव का विश्लेषण किया जाय तो सर्वश्रेष्ठ विवाह पद्धति #ब्रह्मविवाह ही माना जाता है। जो वर्त्तमान समाजशास्त्र और मनुमहराज दोनों के अनुसार समान है। 
प्रश्न उठता है ऐसा क्यों?
अन्य विवाह परम्परा में ऐसा क्या है, जो उन्हें इतना महत्वपूर्ण नहीं समझा जाता, वही #राक्षस_विवाह को तो सबसे घृणित माना गया है?
इसका उत्तर व्यवहार से ज्ञात होता है।

"क्राइम डेटा रिपोर्ट की मान्यता अनुसार-
भारत में परिवार के विरुद्ध(तथाकथित प्रेम विवाह) होने वाले विवाह सम्बंध की सफलता मात्र #पाँच_प्रतिशत है। अर्थात 95% प्रेम विवाह अनिवार्यतः टूटकर समाप्त हो जाते हैं।
पिछले चार वर्ष में लापता होने वाली कुल लड़कियों की संख्या में 95% केसेस ऐसे ही किसी न किसी #प्रेम_प्रसङ्ग के माध्यम का शिकार बने। जिनकी संख्या लगभग 13 लाख से अधिक है।
"जातीय-नरसंहारों(तथाकथित लव जेहाद) की सफलता की बात करूँ तो, प्रेम ही एकमात्र साधन बना।" जिसमें लड़कियों के बचने का प्रतिशत #नगण्य जाना जाता है।
अप्राकृतिक विवाह सम्बन्ध(किशोरियों का बुजुर्गों से विवाह) की घटनाओं में 98% प्रेम ही साधन बना, जो अत्यन्त दुःखद पड़ाव पर समाप्त हुआ।(2% चूँकि परिणाम अज्ञात रहा। इसलिए 98% ही रखा गया)

महानगरों में सजने वाले #वेश्यालयों की झनक किशोरियों(अल्पायु लड़कियों) के प्रेम प्रसङ्ग से ही गुलजार होती है। जहाँ क्राइम रिपोर्ट डेटा की बात करूँ तो, 95% लड़कियाँ यहाँ प्रेम प्रसङ्गों के कारण आती हैं।

भारत में बढ़ते #तलाक की घटनाओं में 95% तक का योगदान प्रेम विवाह का ही जाना जाता है।
जिसमें सर्वाधिक घटनाएँ #इंटरकास्ट की जानी जाती हैं।
भारत में #एकल_माँ की क्रान्ति का बिगुल बजाने वाली #फेमिनिस्ट_दीदियाँ 98% तक "इंटरकास्ट मैरिज" के कारण अपने परिवार और अपने पति का त्याग करके, अन्य किशोरियों को शब्दजाल में उलझाकर उनके पतन में नित्य लिप्त पायी जाती हैं।

80% फेमिनिस्ट दीदियाँ किसी न किसी ऐसे NGO से जुड़ी होती हैं जो #नारी_उत्थान की बात करता है। और क्राइम रिपोर्ट डेटा कहता है कि, भारत में चलने वाला #देहव्यापार किसी न किसी #NGO की आड़ में ही संचालित होता है। जो नारी उत्थान पर कार्य करते हैं।

98% फेमिनिस्ट दीदियाँ इंटरकास्ट मैरिज करने वाली अउ म्लेच्छों से निकाह करके बर्बाद होने वाली ही होती हैं। अपवादस्वरूप ही #फॅमिनिष्ट_दीदियाँ किसी कुलीन घर से और अपने पति परिवार के साथ देखी जाती हैं।

क्राइम रिपोर्ट डेटा के अनुसार, 
                 हरेक नाबालिग लड़की के बर्बादी के पीछे 99.8% किसी न किसी "फॅमिनिष्ट दीदी" से इंस्पायरेशन की घटना जुड़ी होती है। जो आत्महत्या जैसे जघन्यतम अपराध का शिकार बनती हैं।

क्या और भी कुछ जानना और समझना शेष है?
या पर्याप्त है?

जय माँ अम्बे

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