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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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लोकसभा चुनाव बिगुल बज चुका पहले चरण के नामांकन भी हो चुके हैं पहले चरण के लिए चुनाव प्रचार भी शुरू होने वाला है सत्तापक्ष 400 सीट जीतने का दावा तो कर रहा है फिर भी सत्तधारी पार्टी भाजपा के कार्यकर्ता और समर्थक में अति आत्मविश्वास का शिकार लग रहे है। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने सदन में 400 पार का नारा तो दे दिया है 400 पार के नारे को जमीन में उतरने का दायित्व कैडर का होता है कैडर पूरी तरह से निष्क्रिय दिख रहा है। 400 पार करने के लिए जिस स्तर का परिश्रम चाहिए उस तरह का परिश्रम नहीं भाजपा के कार्यकर्ता और समर्थक नहीं कर रहे उन्हें लगता की मोदी ज़ी ने किया तो चुनाव का परिणाम आ गया है मोदी जी की बात पत्थर के लकीर की तरह है।
मै ने कई ऐसी लोकसभा सीट लोगों की बात सुनी वो कहते मिल जाते मोदी जी 400 सीट जीत रहे हैं 1 दो सीट कम भी हो जाएगी तो फर्क क्या पड़ेगा । खासकर उत्तर भारत के राज्यों एक दो सीट कम हुई तो बीजेपी दक्षिण में अच्छा करने के कारण 290 से 320 के बीच रहेंगी 325 भी मुश्किल है 350 पार कर पाना असम्भव लग रहा है चुनाव भाषण और रैली नारे मिडिया मैनेजमेंट से नहीं जीते जाते हैं चुनाव बूथ मैनेजमेंट से जीते जाते हैं भारतीय जनता पार्टी का संगठन इतना बड़ा है उसके साथ संघ अनुसांगिक संगठनों की शक्ति जो प्रत्येक मतदाता को कन्विंस कर लेने की क्षमता रखते है ।
जिस स्तर का बूथ मैनेजमेंट मध्यप्रदेश के 2023 के विधानसभा चुनाव में चुनाव में दिखाई दिया था उस स्तर का बूथ मैनेजमेंट लोकसभा चुनाव में नहीं दिख रहा है भाजपा के कार्यकर्ता घर में बैठे हुए हैं । उदाहरण के लिए मध्यप्रदेश में भाजपा जो सीट चुनाव के पूर्व हार रही थी उन सीटों को बूथ मैनेजमेंट कारण जीत गई चुनाव के पूर्व भाजपा 115 से 125 के बीच था मतदान के दिन अच्छे चुनाव प्रबंधन के कारण 163 पर पहुंच गई यह शक्ति होती बूथ भाजपा का मध्यप्रदेश में बूथ मैनेजमेंट भी अच्छा था उसके साथ महिला मतदाताओं की बहुत अहम भूमिका रही इस भूमिका से कोई इन्कार नहीं कर सकता है ,फिर भी बूथ स्तर के कार्यकर्ता की मेहनत को कोई नहीं भूल सकता है ।
भाजपा का कैडर एक छोटे पार्षद के का भी चुनाव को युद्ध की तरह लड़ता है अर्थात जैसे उसके लिए जीवन का अंतिम चुनाव हो इस माइंडसेट भाजपा का कार्यकर्ता चुनाव लड़ता है दुर्भाग्यवश इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा कार्यकर्ताओं के पक्ष में सभी फैक्टर वैचारिक समाजिक राजनैतिक समीकरण यहां तक मतदाता बीजेपी को स्वप्रेरणा से वोट देना चाहता फिर भी भाजपा कैडर पूरी तरहसे निष्क्रिय दिख रहा है मोदी जी ने 400 पार कह दिया तो 400 पार हो गया ऐसा नहीं होता चुनाव में जब तक आखिरी वोट पड़ न जाए तो तब तक चुनाव को जीता हुआ नहीं मानना चाहिए । इस बार के चुनाव में 2004 जैसी परिस्थिति नहीं है क्योंकि मोदी जी के पास भाजपा का कोर वोट 24% से उपर का है उसमें में मोदी जी ने अपना व्यक्तिगत वोट 15% से 20% का तैयार किया वो एड हो जाता है बीजेपी का वोट शेयर 35%+ हों जाता है आज की स्थिति में भाजपा 290+ के आसपास खड़ी हैं भाजपा का कैडर 400 सीट जीतने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सजगता के साथ परिश्रम करें 350+ सीट बीजेपी जीत सकती है । भाजपा कैडर सक्रिय नहीं हुआ तो बीजेपी की टैली 280 से 300 के बीच रूक सकतीं कहां 400 की पार की बात हो रही थी कहा 300 में टैली अटक गई यह भाजपा की बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक हार होगी विपक्ष की मनोवैज्ञानिक जीत होगी। फिर वैचारिक विषयों पर हिंदुत्व के मुद्दे पर और भविष्य के हजार वर्ष के भारत की नींव रखने की योजना को लागू करने में सरकार को बहुत मुश्किलो का सामना करना पड़ेगा भविष्य के भारत की योजनाओ लागू करने के लिए बड़े सुधारों को लागू करने की आवश्यकता पड़ेगी उसके लिए संविधान संसोधन भी करने पड़ेंगे उसके लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए दो तिहाई बहुमत नहीं मिला तो बड़े सुधारों को लागू कर पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा ।
भाजपा को 400 सीट की क्यो चाहिए
1) संविधान की प्रस्तावना से सेक्युलरिज्म और समाजवाद हटाने के लिए
2) एक हजार वर्ष के भारत की नींव रखने के लिए
3) हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए
4 )न्यायिक और प्रशासनिक सुधार के लिए
5)2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में रोड़ा बन रहे सिस्टम की सर्जरी करने के लिए
6) मजबूत हिंदू इको सिस्टम को बनाने के लिए
7) एक देश एक चुनाव के लिए
8) समान नागरिक संहिता के लिए
9 ) सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए
10) मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए
11) भारत को विश्व की आर्थिक महाशक्ति बनाने की नींव को और मजबूत करने के लिए।
12) पाक अधिकृत कश्मीर वापस लेने के लिए ।
यह सब सरकार तभी कर पाएगी जब भाजपा का कैडर परिश्रम करेगा नहीं तो भाजपा क कार्यकर्ताओ की छोटी सी लापरवाही बहुत भारी पड़ सकती है 2024 का चुनाव भारत भविष्य तय कने जा रहा है इस चुनाव को भाजपा के कैडर और आम हिन्दू जनमानस ने युद्ध की तरह तरह नहीं लिया तो हमारे पुर्वजों की हजार वर्ष की लडाई एक झटके में व्यर्थ हो जाएगी भारत हजारो वर्षो की गुलामी अंधकार में फिर से चला जाएगा इसलिए जब तक आखिरी वोट न पड़ जाए जबतक चुनाव जीता हुआ मानना बहुत बड़ी भूल हो सकती है । इसलिए जब तक आखिरी वोट न पड़ जब तक चैन से नहीं बैठना है अभी भी समय है भाजपा के कार्यकर्ता और समर्थक और आम हिन्दू जनमानस मिशन 400 के लिए तन मन धन के साथ लग जाए जैसे रामसेतु के निर्माण के लिए वनार सेना के साथ मिलकर गिलहरी ने अपना योगदान दिया था वैसे ही राष्ट्र निर्माण धर्म के पुनः उत्थान में अपना गिलहरी की तरह अपना छोटा सा योगदान अवश्य करें
दीपक कुमार द्विवेदी
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