सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

Ram Mandi: राम मंदिर से इतनी नफ़रत क्यो कुछ लोग करते हैं ?

सुरन्या अय्यर को जानते हैं आप ?
जी हां मणिशंकर अय्यर की बेटी सुरन्या , जो पिछले पन्द्रह दिनों से राम मंदिर के विरुद्ध सोशल मीडिया पर जमकर बरस रही है ?
दिल्ली जंगपुरा में रहती हैं , रोजाना मंदिर बनाने के खिलाफ भड़काऊ वीडियो वायरल करती हैं , हिन्दू समाज को जमकर कोसती हैं !
इतना ही नहीं , राम मंदिर निर्माण के खिलाफ़ तीन दिन उपवास रक्खा !

सोसायटी में माहौल काफी खराब होते देख सोसायटी अध्यक्ष कक्कड़ में उन्हें तीन दिनों में फ्लैट खाली करने का नोटिस दिया है !
साथ ही मणिशंकर से कहा गया है कि सोसायटी वासियों में भारी नाराजगी को देखते हुए वे बेटी को लेकर यहां से निकल जाएं !
वामपंथी सुरन्या के पास आने वाले युवाओं का भी हाउसिंग सोसाइटी में आने का विरोध किया गया है !

घटना भले छोटी हो , पर देश का मिजाज बताने के लिए काफी है । हाल ही में जब ज्ञानवापी विश्वेश्वर मामले में एएसआई की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई , तब भी देश के मिजाज का पता लग गया था । कल जब कोर्ट ने ज्ञानवापी के व्यास तहखाने में पूजा की अनुमति प्रदान की , मिज़ाज का पता तब भी लग गया था । बार बार क्या याद दिलाएं कि 2019 में अयोध्या पर सर्वोच्च अदालत का सर्वसम्मत फैसला आने के बाद देश का माहौल पूरी तरह बदला हुआ है । सच कहें तो 22 जनवरी को रामलला के मंदिर में प्रतिष्ठित होते ही देश का मिजाज़ भी पूरी तरह बदल गया है । 

अब यदि इस बदले मिजाज़ को विपक्षी दलों के बड़े बड़े दिग्गज ही न समझ पाए तो सुरन्या अय्यर या मणिशंकर क्या समझेंगे ? समझ जाते तो सोनिया , खड़गे , अधीर रंजन , अखिलेश और लालू जैसे बड़े नेता राम मंदिर का निमंत्रण ठुकराने का पाप न करते । भगवान के आगमन का भी अभिमान में डूबे जो लोग वोटों के कारण तिरस्कार कर सकते हैं , वे राममय हुए एक पूरे राष्ट्र के उत्सव को कैसे समझ पाते ? 

जब इतने बड़े बड़े दिग्गजों की समझ कुंठित हो गई हो तो सुरन्या अय्यर की क्या बिसात । उसे तो वैसे भी पिता मणिशंकर अय्यर से काफी कुछ खून में मिला है । वैसे उस बेचारी सुरन्या का इतना कसूर भी नहीं , उसका जेएनयू छात्रा होना ही काफी है । सोसायटी वाले उसका घरौंदा न छीनें , हमारी यही कामना है ।

देश बदल रहा है , समझ लीजिए । अब कोई भी देशवासियों को लाठी से नहीं हांक सकता । छद्मवादी राजनीति अब नहीं चलेगी तो नहीं चलेगी । छिपाइए नहीं , खुलकर बताइए कि आप कैसे हैं । हर देश का एक अतीत होता है । भारतवासियों से जो कुछ भी छीना गया , वे अब उसी अतीत के वैभव से जुड़ गए हैं । 

सब समझ भी गए हैं कि किसका क्या लुटा था , किसने लूटा था । समय अपना काम करता है , समय ही इंसाफ करता है । वह होने दीजिए । बस हम सभी को एक बात याद रखनी है कि हमारी प्राथमिकता राजनीति नहीं , धर्म नहीं , हमारी प्राथमिकता राष्ट्र है ।देश के हम 140 करोड़ लोग राष्ट्र के प्रति जवाबदेह हैं । यह राष्ट्र है , तभी हमारा वजूद है । राम भी राष्ट्रवाद का जीवंत प्रतीक हैं । उनसे इतनी नफरत करेंगे तो यह समाज ही सामने खड़ा हो जाएगा ।

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