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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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महर्षि अगस्त्य तमिल साहित्य के पितामह हैं । महर्षि अगस्त्य को तमिल का ज्ञान भगवान शिव से प्राप्त हुआ था । #श्रीविद्या के महान साधक हैं महर्षि अगस्त्य ।
महर्षि अगस्त्य को महर्षि कुम्भोदर के नाम से भी जाना जाता है। कलरीपायट्टु के दक्षिणी शैली #वर्मक्कलै के आदिगुरु अगस्त्य जी ही हैं । भगवान शिव से यह विद्या परंपरागत रूप से भगवान #कार्तिकेय , भगवान #परशुराम और महर्षि अगस्त्य जी प्राप्त करें थें ।
तमिलनाडु में जब पेरियार का द्रविणवाद चला तो सबसे पहले अगस्त्य जी ,प्राचीन तमिल साहित्य और इनको मानने वाले ब्राह्मणों को ही हटाया गया । अगर तमिलनाडु में महर्षि अगस्त्य को तमिल आत्मसम्मान से जोड़कर सामने लाया जाएगा तो इससे काफी सकरात्मक प्रभाव पड़ेगा ।
फोटोशॉप के सहायता से बना हुआ अगस्त्य जी व माता लोपामुद्रा का फोटो 👇
जय_श्री_राम 🚩
श्रीयुत सांकृत्यान
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