सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

तमिल साहित्य के पितामह किसे कहा जाता है?

महर्षि अगस्त्य तमिल साहित्य के पितामह हैं । महर्षि अगस्त्य को तमिल का ज्ञान भगवान शिव से प्राप्त हुआ था । #श्रीविद्या के महान साधक हैं महर्षि अगस्त्य । 

महर्षि अगस्त्य को महर्षि कुम्भोदर के नाम से भी जाना जाता है। कलरीपायट्टु के दक्षिणी शैली #वर्मक्कलै के आदिगुरु अगस्त्य जी ही हैं । भगवान शिव से यह विद्या परंपरागत रूप से भगवान #कार्तिकेय , भगवान #परशुराम और महर्षि अगस्त्य जी प्राप्त करें थें । 

तमिलनाडु में जब पेरियार का द्रविणवाद चला तो सबसे पहले अगस्त्य जी ,प्राचीन तमिल साहित्य और इनको मानने वाले ब्राह्मणों को ही हटाया गया । अगर तमिलनाडु में महर्षि अगस्त्य को तमिल आत्मसम्मान से जोड़कर सामने लाया जाएगा तो इससे काफी सकरात्मक प्रभाव पड़ेगा । 

फोटोशॉप के सहायता से बना हुआ अगस्त्य जी व माता लोपामुद्रा का फोटो 👇

जय_श्री_राम 🚩

श्रीयुत सांकृत्यान

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