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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
Sanatan Dharm : उदयनिधि ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात की सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया बताया, क्या इस देश में सनातन धर्म को गाली देना समान्य बात हो गई ? इस तरह के प्रश्न क्यों खड़े हो रहे हैं ? जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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भारतीय राजनीति में स्वतंत्रता के पूर्व से एक अजीब विडंबना सेकुलरिज्म के नाम पर देखी जा रही है ।इस देश में सेकुलरिज्म के नाम पर सनातन हिन्दू धर्म पर परंपराओं प्रहार करना आम बात हो चुकी है । सनातन धर्म और ब्रह्माणवाद के विरोध के नाम पर एक वर्ग कभी सुधारवाद के नाम पर सनातन धर्म के मूल सिद्धांतो पर प्रहार करने लगता है तो दूसरा वर्ग भाषा क्षेत्र और नस्ल के आधार पर सनातनी हिन्दू समाज के बांटने लगता है । यह सब अमेरिका और वेटिकन चर्च के इशारे पर हो रहा है । क्योंकि इन शक्तियों को लगता सनातनी हिन्दू समाज एक बार उठ खड़ा हो गया तो हिंदू समाज को रोकना असंभव हो जाएगा। इसलिए ये लोग बार बार सनातन हिन्दू धर्म के मर्म स्थानों पर प्रहार करते रहते हैं।
आप लोग ने एक खबर पढ़ी होगी तमिलनाडु के DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की बात की है । उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेगू मलेरिया और कोराना वायरस से की है । उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे हैं । उनके दादा के करूणानिधि 1969 से 2011 तक 5 बार मुख्यमंत्री रहे हैं । आज उनके पिता एमके स्टालिन मुख्यमंत्री है । इसके अलावा उदयनिधि तमिलनाडु सरकार में खेल और युवा मामलो के मंत्री हैं एवं DMK के युवा इकाई के सचिव है । साथ में अभिनेता रहे हैं अब फिल्म निर्माता हैं ।
विषय को सरल शब्दों में समझना है तो यह कह सकते उदयनिधि DMK के भविष्य हैं अब एमके स्टालिन 71 वर्ष के हो चुके हैं इसलिए उनके पिता भविष्य की राजनीति के लिए तैयार कर रहे हैं । करूणानिधि का परिवार की राजनीतिक विरासत अब 50 वर्ष से उपर की हो चुकी है । इस परिवार ने सत्ता के गलियारों से लेकर उद्योगो तक अपने को स्थापित कर लिया है इस परिवार के सदस्य मुख्यमंत्री से लेकर सांसद विधायक और केन्द्रीय मंत्री तक रहे हैं । तमिलनाडु का सन ग्रुप इसी परिवार का हिस्सा है इस समूह के मालिक करूणानिधि के भांजे के बेटे दयानिधि मारन है ।
क्या सेकुलर राजनीतिक दलों के नेता इस्लाम ईसाईयत पर इस तरह का अनर्गल प्रलाप कर सकते हैं ?
मैं ने अपने आलेख उपर में एक बात लिखा हूं भारत की राजनीति में सेकुलरिज्म के नाम पर अजीब विडंबना देखी जा रही है इस देश में सेकुलरिज्म के नाम पर सनातन हिन्दू धर्म पर परंपराओं प्रहार करना आम बात हो चुकी है। यह सब अमेरिका और ईसाई तंत्र के द्वारा संचालित है । क्या सेकुलर राजनीतिक दल और उनके नेता इस्लाम ईसाईयत और अन्य मत पंथो पर इस तरह की टिप्पणी करने का साहस रखते हैं ? क्या इस तरह से अन्य मत पंथ संप्रदायो मतो को खत्म करने की खुले तौर पर बात कर सकते हैं? इस तरह का अनर्गल प्रलाप अन्य मतो के लिए कोई नेता किया होता तो सुप्रीम कोर्ट अभी तक स्वत: संज्ञान ले चुका होता भारत में जगह जगह आग जनी हो रही होती देश के अलग अलग हिस्सों में सर तन जुदा के नारे लगाते हुए भीड़ जूलूस निकाल रही होती दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन वामपंथी विचारधारा प्रेरित NGO भारत में असहिष्णुता बढ़ने का राग अलाप रहे ईसाई और मुस्लिम ईसाई देश भारत को धमकी दे रहे होते अंत में राजनीतिक दल उस नेता को जिस तरह से दुध से मक्खी को निकाल फेक दिया जाता है उसी प्रकार से पार्टी उस नेता को पार्टी से निकाल चुकी होती है ।
तमिलनाडु की सनातन धर्म विरोधी द्रविड़ राजनीति का इतिहास
भारत के राजनीति में द्रविड़ राजनीति के नाम पर सनातन धर्म और ब्रह्माण बनियो के विरोध की राजनीति नई नहीं है इस राजनीति के जनक पेरियार रामास्वामी था जिसकी सनातन हिन्दू धर्म से घृणा इस स्तर पर थी वह तमिलनाडु को अलग से द्रविड़लैड बनाने की बात करता था और ब्राह्मणों का नरसंहार का उसने ने कराया है पेरियार इस तरह का सनकी था उसने अपने बेटी से विवाह कर लिया था । इस कारण क्षुब्ध अन्नादुराई ने उससे दूरी बनानी ही उचित समझी और DMK की स्थापना की। फिर वो राज्य के पहले गैर-कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री बने, लेकिन 2 साल पद पर रहने के बाद बीमारी के कारण निधन हो गया और करुणानिधि को इसका फायदा मिल गया।
जिस MGR ने करुणनिधि को CM बनाया उस समय, बाद में उन्हीं एमजीआर से उनकी नहीं पटी। पार्टी के सबसे लोकप्रिय चेहरे को ही निकाल दिया गया पार्टी से। उसके बाद MGR ने अलग पार्टी बनाई और जब तक ज़िंदा रहे करुणानिधि को सत्ता में नहीं आने दिया। वो अलग बात है कि इस द्रविड़ खेला में कॉन्ग्रेस इस तरह फस गई कि तमिलनाडु में सहयोगी पार्टी ही बन कर रह गई।
पेरियार ने 'ब्राह्मणों के सफाए' की बात की थी। खुद जवाहरलाल नेहरू मानते थे कि उसे कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए। आज नेहरू की औलादें भी पेरियार के गुण गा रही हैं।
ये मैं नहीं कह रहा। खुद समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया ने 'चौखम्भा' नामक पत्रिका में बताया था कि जब वो मद्रास सरकार से अनुमति लेकर पेरियार से मिलने पहुँचे तब वह अस्पताल में था। वहीं दोनों की बातचीत हुई एक दुभाषिए के जरिए। उसी दौरान पेरियार ने बताया कि नेहरू ने उसे पागल कहा है। सोचिए, जो नेहरू की नज़र में पागल था उसे नेहरू की औलादें आज पूज रही हैं। तब लोहिया ने पेरियार को समझाया था कि जातिवाद विरोधी आंदोलन को 'ब्राह्मणवाद' की तरफ नहीं मोड़ना चाहिए।
तमिलनाडु में सनातन हिन्दू धर्म और ब्रह्माणवाद और हिंदी बनाम तमिल का जो विमर्श चल रहा उसके पीछे चर्च और अमेरिका का हाथ इस विषय पर बहुत सारे शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं आर्य द्रविड़ थ्योरी में पश्चिमी हस्ताक्षेप था। ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रायोजित पेरियार रामास्वामी जैसे लोगों ने तमिलनाडु के ईसाईकरण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। ये लोग बात भाषीय अस्मिता की करते थे और तमिल भाषा की जगह अंग्रेजी को प्रथामिकता देते हैं तमिलनाडु के वर्तमान मुख्यमंत्री कन्वर्टेड क्रिश्चियन उनके पिता एम करुणानिधि में कन्वर्टेड क्रिश्चियन थे इस सच को तमिलनाडु के आम लोगों छिपाने के लिए भाषावाद क्षेत्रवाद नस्लवाद अलगाववाद को बार बार बढ़ावा दिया जाता है ।
सनातन धर्म को गाली देना अब समान्य हो चुका है
आप लोग कुछ वर्षों में देखा होगा सनातन धर्म के पर अभद्र टिप्पणियों की बाढ़ आ चुकी है समाजवादी पार्टी के स्वामी प्रसाद मौर्य भी हैं, जिन्होंने तुलसीदास और रामचरितमानस के लिए बार-बार विवादित शब्दावली का इस्तेमाल किया। अब उन्होंने कह दिया है कि हिन्दू नाम का कोई धर्म ही नहीं है, ये ब्राह्मण धर्म है। उन्होंने हिन्दू धर्म को धोखा बता दिया। इसी तरह, बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव जो प्रोफेसर होने के बावजूद विधानसभा में शब्दों को ठीक से नहीं बोल पाते, उन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों के मन में रामचरितमानस को लेकर ज़हर भरा। उसके आलावा दिलीप मंडल दिन भर सनातन धर्म और ब्रह्माणो के प्रति जहर उगलता रहता है उसके विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होती है । उसके आलावा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के पिता नंद कुमार बघेल ने ब्रह्माणो यूरेशिया भेजने की बात की थी इसी तरह की बात अभी एक सप्ताह पहले बिहार सरकार में मंत्री श्रमण कुमार ने भी की थी । इसके अलावा जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में सनातन धर्म और हिन्दुत्व , ब्रह्माणवाद को गाली देना सनातन हिन्दुत्व से आजादी के नारे अब समान्य हो चुके हैं । दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता राजेंद्र पाल गौतम खुलेआम 10 हजार हिंदूओं का मतांतरण करके बौद्ध बना रहे । नव बौद्धों के नाम पर सनातन विरोधी नारेटिव पूरे देश में चल रहा है और बौद्धो के सनातन धर्म अलग दिखाने का प्रयास किया जा रहा है और कहा जा रहा अंबेडकरवादी ही बौद्ध है इस तरह का सनातन धर्म विरोधी जहरीला विमर्श अब अब आम हो चुका है । सनातन धर्म को गाली देना अब देश में अब समान्य घटना मानी जाने लग गई है । सनातन धर्म को गाली देने वाले नेताओं और संगठनो के उपर कोई कार्यवाही नहीं होती है ।
संपादकीय
दीपक कुमार द्विवेदी
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