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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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धीरे धीरे स्त्री जाति पर भारी पड़ता जा रहा है । पहले स्त्री जाति को घर के काम में बहुत परिश्रम करना पड़ता था । गाय संभलानी पड़ती थी । दूर से पानी भरकर लाना पड़ता था । कपड़े हाथ से धोने पड़ते थे । परिवार भी बड़े होते थे । उपले तैयार करने पड़ते थे । चुहले के लिए लकड़ियां जलानी पड़ती थी । चार पांच बच्चों को संभलना पड़ता था । दारिया, चादरे ,कोटि स्वेटर बुनना पड़ता था । अनाज को home storage में संभलना पड़ता था । और भी बहुत काम करने पड़ते थे । लेकिन आजकल शहरी हाउस वाइफ को बहुत कम काम करने पड़ते हैं । कपड़ों के लिए fully automatic machine आ गई है । पानी एक बटन पर भर जाता है । बच्चा एक ही है वो भी जन्म लेते ही क्रेच में स्कूल में , ट्यूशन पर ,मोबाइल पर धकेल कर अपना पिंड छुड़ा लिया जाता है । बासी खाना स्टोर करने लिए फ्रिज , गर्म करने के लिए ओवन है । एक दो बेडरूम वाले छोटे छोटे पिंजड़े हैं । एक समय का खाना बाहर से आ जाता है कुछ मिलाकर पहले की अपेक्षा बहुत कम काम बचा है ।
इसके बाबजूद फेमिनिज्म वाली आंटिया कहती हैं कि महिलाओं पर अत्याचार अधिक हो रहा है । सरकार ,कोर्ट ,मीडिया , वामपंथी और फर्जी राष्ट्रवादी , कंपनियों से पैसे लेकर दिन रात कड़े से कड़ा कानून बनाने में लगे हैं। दहेज कानून ,domestic violence act, marital rape , तलाक के बाद बच्चों को पिता से ना मिलने देने के नियम , गुजारा भत्ता , संपति में आधा हिस्से आदि के चलते पुरुष अब बहुत मानसिक प्रतंडना झेल रहा है । वह दिन दूर नही जब भारतीय पुरुष विवाह को बाय बाय कह देगा क्योंकि विवाह के बाद पुरुष को कोई एक अधिकार भी नही है । अब extra marital affairs को कानूनी करने के तलिवानी कोर्ट के फतवे ने पति को अपनी पत्नी से वफा की उम्मीद रखने का हक भी नहीं है । जब पुरुष का बच्चों पर हक नहीं , वफा का हक नहीं ,घटिया पार्टनर से तलाक का हक नहीं तो पुरुष शादी कर स्त्री का 🏧 ,ड्राइवर , डिलीवरी बॉय क्यों बनेगा वह live in वाली नई सरकारी व्यवस्था का लाभ क्यों नहीं लेगा जिसमे कोई जिम्मेवारी नहीं केवल साल दो साल का काम सुख है या फिर सरकारी कोठे की व्यवस्था भी खुली होगी ।
कुल मिलाकर अत्याधिक फेमिनिज्म के कठोर सरकारी फतवे परिवार व्यवस्था का गला घोंट देंगे । अब तो पत्नी मोटी हो गई उसको कोई बीमारी हो गई पति उसकी देखभाल करता है । क्या live in वह यह करेगा क्या लाइव इन वह 🏧 या ड्राइवर बनेगा ,सारी उम्र आपका साथ देगा । उतर हैं नहीं ।
सार है कि फेमिनिज्म, लिव इन और पुरुष विरोधी ,परिवार विरोधी कानूनों का विरोध करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी महिलाओं पर है क्योंकि जितनी परिवार की जरूरत पुरुषो को है उतनी महिलाओं को भी ।
फेमिनिज्म से सबसे अधिक हानि महिलाओ को होगी । जिस किसी को शक है वह अमेरिका की ,जापान की स्त्री जाति की वर्तमान स्थिति देख लो । इन देशों के अच्छे भले परिवार थे आज इन देश की औरतों को कितने घिनौने काम करने पड़ते हैं यह किसी से छुपा नहीं ।
राजीव कुमार
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