सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

क्या हिंदू समाज का अत्यधिक प्रतिक्रियावादी होना हिंदू समाज के लिए घातक साबित हो रहा है ?


                            प्रतीकात्मक चित्र

भारत के स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद जितनी भी दंगे हुए उसमें एक पैटर्न मिलेगा दंगे करने वाले इस्लामिक जेहादियों को पीड़ित बताने का प्रयत्न किया जाता है और दंगे में जो सही पीड़ित हैं उन्हें दोषी सिद्ध कर दिया जाता है । उदाहरण के लिए मोपला नरसंहार को कृषक समूह का उच्च वर्ग के विरूद्ध एक आंदोलन बता दिया गया इसे धार्मिक रंग न देने को कहा गया ज़मीनी हकीकत उसे बहुत विपरीत थी । मोपला नरसंहार जेहादियों द्वारा हिन्दुओं के विरूद्ध जेहाद था इस सत्य को छुपा हमसे छुपा लिया गया । इसके बाद देश में जीतने भी दंगे हुए सभी में यही पैटर्न रहा की दंगों शुरू करने वाले जेहादी समुदाय को पीड़ित बता दिया गया दंगों से पीड़ित हिंदू समाज को दंगो के लिए दोषी करार दे दिया गया । 

भारत में हिन्दू मुस्लिम की समास्या न कोई राजनैतिक समास्या है न कोई समाजिक समास्या भारत में हिन्दू मुस्लिम की समस्या न संघ भाजपा बंजरग दल के कारण शुरू हुई भारत में हिन्दू मुस्लिम समास्या की सातवीं सदी शुरू हुई थी जब सिंध में पहली बार मुहम्मद बिन कासिम ने आक्रमण किया था उसके बाद आज तक वही सिलसिला जारी है। पिछले हजार वर्ष में गंगा में बहुत पानी बह चुका है । पहले आक्रमण से लेकर आज तक करोड़ संख्या में हिंदू मार दिए गए पश्चिमी इतिहासकार कहते हैं 12 वी सदी से 1947 तक 8 से 10 करोड़ हिंदुओं को मारा गया है। आज भी हिंदू इस्लामिक जेहाद क शिकार हो रहा है । कुछ लोग कहते हैं भारत हिन्दू मुस्लिम की समस्या संघ भाजपा बजरंग दल के कारण शुरू हुई पहले तो दुध की नदियां बहती थी पहले हिंदू मुस्लिम एक साथ रहा करते थे । जब हिन्दू मुस्लिम एक साथ रहते थे 800 वर्षों में 10 करोड़ हिंदुओं को हिन्दुओं को मार दिया होगा क्योंकि इनके अनुसार इस्लाम बहुत शांतिप्रिय मजहब है। इन लोगो ने से मेरा प्रश्न जब पिछले 800 वर्षों में 10 करोड़ हिंदुओं को मारा गया भारत विभाजन के वक्त 40 लाख हिन्दूओं को मारा गया था न उस वक्त संघ था न भाजपा ने विश्व हिन्दू परिषद फिर आपके शांतिप्रिय मुस्लिमो 800 वर्षो में  10 करोड़ हिंदुओं और भारत विभाजन के वक्त 40 लाख हिन्दूओं को क्यों मारा ? उस वक्त संघ भाजपा बंजरग दल विश्व हिन्दू परिषद भी नहीं थे । इससे यह सिद्ध होता भारत हिन्दू मुस्लिम की समास्या न समाजिक है न राजनैतिक यह समास्या एक किताब कारण उत्पन्न हुई है जो उस किताब को नहीं मानता है वह काफिर है । आसमानी किताब की आयत कुछ आयत जो काफिर के खिलाफ युद्ध करने को कहती हैं । 
  3- Verse 4 Surah 101 وَاِذَاضَرَبۡتُمۡفِىالۡاَرۡضِفَلَيۡسَعَلَيۡكُمۡجُنَاحٌاَنۡتَقۡصُرُوۡامِنَالصَّلٰوةِ ​ۖاِنۡخِفۡتُمۡاَنۡيَّفۡتِنَكُمُالَّذِيۡنَكَفَرُوۡا​ ؕاِنَّالۡـكٰفِرِيۡنَكَانُوۡالَـكُمۡعَدُوًّامُّبِيۡنًا‏
अर्थ निःसंदेह ‘काफिर तुम्हारे खुले दुश्मन हैं.” (5.4.101. पृ. 239 कहती   
4- Verse 9 Surah 123 يٰۤـاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡاقَاتِلُواالَّذِيۡنَيَلُوۡنَكُمۡمِّنَالۡكُفَّارِوَلۡيَجِدُوۡافِيۡكُمۡغِلۡظَةً​ ؕوَاعۡلَمُوۡاۤاَنَّاللّٰهَمَعَالۡمُتَّقِيۡنَ अर्थ हे ‘ईमान‘ लाने वालों! (मुसलमानों) उन ‘काफिरों‘ से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुममें सखती पायें.” (11.9.123 पृ. 391) 

5- Verse 4 Surah 56 اِنَّالَّذِيۡنَكَفَرُوۡابِاٰيٰتِنَاسَوۡفَنُصۡلِيۡهِمۡنَارًاؕكُلَّمَانَضِجَتۡجُلُوۡدُهُمۡبَدَّلۡنٰهُمۡجُلُوۡدًاغَيۡرَهَالِيَذُوۡقُواالۡعَذَابَ​ ؕاِنَّاللّٰهَكَانَعَزِيۡزًاحَكِيۡمًا‏ अर्थ जिन लोगों ने हमारी ”आयतों” का इन्कार किया, उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे. जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें. निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं” (5.4.56 पृ. 231)

13 -Verse 8 Surah 69 فَكُلُوۡامِمَّاغَنِمۡتُمۡحَلٰلاًطَيِّبًاۖوَّاتَّقُوااللّٰهَ​ ؕاِنَّاللّٰهَغَفُوۡرٌرَّحِيۡمٌ अर्थ तो जो कुछ गनीमत (का माल) तुमने हासिल किया है उसे हलाल व पाक समझ कर खाओ” (10.8.69. पृ. 359) 

अभी कुछ आयतों का ही उदाहरण दिया ऐसी 26 खूनी आयते है इसलिए जो लोग कहते हैं हिंदू मुस्लिम की समास्या संघ भाजपा कारण शुरू हुई वह आसमानी किताब की 26 खूनी आयते जरूर पढ़ें । 
 
हिंदू समाज दंगे होने का इंतजार क्यों करता हैं ? हम अपने शत्रुओं को विक्टिम कार्ड खेलने का अवसर बार बार क्यों दे रहे हैं  


भारत में इस्लामिक जेहादी दंगे शुरू करते अंत हम करते हैं इस बात को हिन्दू समाज बार बार दोहरा कर हिंदू समाज गौरवान्वित महसूस करता है । यह बात पूर्णतः सत्य दंगे जेहादी शुरू करते हैं अंत हम करते हैं । हिंदू समाज की क्रिया के बाद प्रतिक्रिया देने की मानसिकता कारण जेहादी जानते हैं हम दंगे करेंगे हिन्दू प्रतिक्रिया नहीं करेगा जब प्रतिक्रिया देगा तो बहुत देर हो चुकी होगी जब तक हमारा काम पूरा हो जाएगा ,हम हिन्दूओं अंदर भय पैदा कर चुके होंगे जब हिन्दू प्रतिक्रिया देगा उसके बाद सरकार पास चले जाएंगे शांति समझौते की बात करने लगेंगे सरकार द्वारा बनाई गई पीस कमेटी में हम बैठ जाएंगे उसके बाद हम अल तकिया शुरू करेंगे भोला भाला हिंदू हमारे जाल में फंसाकर हमसे समझौता कर लेगा । इसके बाद कुछ साल में हिंदू दंगे को भूल जाएगा फिर से अपनी गतिविधियां कुछ वर्षों में शुरू कर देंगे । क्योंकि भोला भाला हिंदू इनकी रणनीति को समझे बिना बली का बकरा बनने को तैयार हो जाता है । हिंदू समाज को यह पता नहीं है क्रिया होने के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त करना एक स्वाभाविक सी बात है । इससे हिंदूओ को कोई लाभ नहीं होने जा रहा है । हमारी तैयारी ऐसी क्यों नहीं सकती ? हमारे शत्रुओं को मन में भय व्याप्त हो जाए वो एक पत्थर मारेंगे तो हमारी ओर से 1000 पत्थर मारे जाएंगे इस तरह की हमारी तैयारी क्यो नही हो सकती है ? क्या हम सिर्फ क्रिया प्रतिक्रिया देते रहेंगे ? क्योंकि क्रिया प्रतिक्रिया देते देते जान माल का बहुत नुक्सान हो चुका होता है । हम अपना नुक्सान उठाकर क्रिया प्रतिक्रिया देने इतंजार क्यों करे ? जब हमे शत्रु विचारधारा के विषय मे पूरी जानकारी है । इसलिए हमें इस युद्ध में विजय प्राप्त करनी है तो अपनी सोच पूरी तरह से बदलनी होगी तभी हम इन जेहादियों लड़ सकते हैं नहीं तो ऐसे हम मारते रहेंगे हमारी बात कोई भी सुनने को तैयार नहीं होगा दंगे भी वही करेंगे विक्टिम कार्ड भी वही खेलेंगे इसलिए हमारे शास्त्रों में कहा गया है भय बिन होय न प्रीत जब तक हमारा भय शत्रुओं को मन में नहीं होगा हम चाहे कुछ भी करे हम युद्ध नहीं जीत पाएंगे । 

दीपक कुमार द्विवेदी

टिप्पणियाँ

  1. सुंदर और सटीक लेख 👍

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  2. संविधान और प्रशासन इन्हें प्रश्रय देता जाएगा। अंत तो प्रतिक्रिया से ही संभव है

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    1. प्रतिक्रिया देने में समय लगता है कभी कभी बहुत देरी हो जाती है । इसलिए सचेत रहना चाहिए जिससे इनकी क्रिया करने हिम्मत नहीं हो सकें

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