सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

पूंजीवादी केंद्रीकृत व्यवस्था एक देश को कैसे तबाह करती है फ्रांस इसका ज्वलंत उदाहरण है

 । 
पहले पूंजीवादी केंद्रीकृत व्यवस्था किसी देश के धर्म ,संस्कृति और परिवार व्यवस्था को नष्ट करती है ताकि अधिक से अधिक लोग अपनी आधारभूत जरूरतों के लिए इन कंपनियों पर निर्भर हो जाएं । 

फेमिनिज्म नाम का जहर बो कर महिलाओ को परिवार से बाहर निकाल कर सस्ती लेबर और उपभोक्ता में तब्दील कर लिया जाता है जिससे परिवार टूट जातें हैं जनसंख्या कम होने लगती है । 

जब जनसंख्या कम होने लगती है तो बूढ़ी होने लगती है । फिर कंपनियों के लिए सस्ती लेबर के लिए immigration के रास्ते विदेशों से लेबर इंपोर्ट कर ली जाती है । 
फ्रांस के केस में यह सस्ती लेबर मुस्लिम बहुल देशों से आ रही है जिनकी सभ्यता और संस्कृति इन देशों से नहीं मिलती । फिर इन देशों में दंगे फसाद होते हैं ।

जिनको बेवकूफ लोग liberalism की आड़ में छुपा लेते हैं लेकिन पूंजीवाद की गुनाह के बारे में कोई नहीं बोलता । 

वामपंथी केंद्रीकृत व्यवस्था में भी धर्म  सभ्यता , संस्कृति और परिवार को तोड़ा जाता है लेकिन पूंजीवाद से कम आय के कारण इन देशों में कोई आना नहीं चाहता । 

भारत में भी यह सब कुछ हो रहा है लेकिन कोई बोल नहीं रहा । 

फ्रांस ,यूरोप तो इस्लामिक स्टेट बनने से कोई नहीं रोक सकता क्योंकि पूंजीवादी केंद्रीकृत व्यवस्था ने इंग्लैंड ,फ्रांस ,जर्मनी सबकी परिवार व्यवस्था तबाह कर दी है । जो तब तक सही नही होगी जब तक सनातन विकेंद्रीकृत , धर्म आधारित localization का मॉडल को अपना नही लिया जाता । 

मुझे यूरोप की रत्ती भर चिंता नही इन्होंने अफ्रीका ,भारत और साउथ अमेरिका के लोगों की हड्डियां तक चूस डाली ।गीता की कर्म सिद्धांत की थ्योरी इन पर लागू हो कर रहेगी । चिंता मुझे भारत की है यहां पर लोग अंधेरे में हाथ मार रहें हैं । जो पूंजीवादी केंद्रीकृत व्यवस्था का मॉडल यूरोप को नहीं बचा सका वो भारत की क्या रक्षा करेगा।

टिप्पणियाँ