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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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स्क्रीनकाउंट बहुत कम मिला है द केरला स्टोरी को। ऐसे मामलों में बॉलीवुड का नेक्सस तो पूरी कोशिश करता ही है, लेकिन द केरला स्टोरी के मामले में स्वयं स्टेट भी विरोध में खड़ा है। किसी नेक्सस और स्टेट दोनों का गठजोड़ अपने आप में ही एक बड़ी ताकत है। इस ताकत से मुकाबला आसान नहीं है। फिर एक अंतिम उपाय रह जाता है, जनक्रांति। द कश्मीर फाइल्स जब सिनेमाघरों में उतरी, केवल 600 स्क्रीनकाउंट मिले। लेकिन 600 स्क्रीन काउंट से 6000 तक किसने पहुंचाया? जब कोई आवाज जनता की आवाज बन जाती है, जनक्रांति बन जाती है। तब कितनी भी मजबूत लॉबी हो, चाहे स्टेट से उसका गठजोड़ हो, सबको झुकना पड़ता है।
जिस केरल की भूमि का पूरे जिहाद के लिए इस्तेमाल किया गया, उसी केरल में द केरला स्टोरी को कितने स्क्रीनकाउंट मिले? बड़ी मशक्कत से महज 2 फिल्म हॉल उपलब्ध कराया गया है। 15 करोड़ की मामूली सी फिल्म है। लेकिन 15 करोड़ में जितना सत्य कहा जा सकता है, वह पूरे एक गठजोड़ पर भारी चल रहा है। जितने ही स्क्रीन उपलब्ध हो पाए हैं, सब पर दर्शकों के बेहतरीन प्रतिक्रिया है। डेढ़-डेढ़ सौ करोड़ की बजट लगाकर बॉलीवुड फिल्में बनाता है, जिसे प्रचार के बलबूते पर्दे पर चढ़ते हुए तो हर कोई देखता है, लेकिन परदे से कब उतर जाता है, पता भी नहीं चलता। बॉलीवुड पूरी तरह से निराश हो चुका है। उसने मान लिया है कि अब दर्शक बड़े पर्दे के बजाय ओटीटी की तरफ रुख कर चुके हैं।
सत्य तो यह है कि दर्शक अब बस सत्य देखना चाहते हैं। और बगैर किसी पब्लिसिटी स्टंट के द केरला स्टोरी को बढ़िया ऑक्युपेंसी भी दे रहे हैं। भारत का फिल्म दर्शक समाज बॉलीवुड के अंतरंग फैंटेसीज से ऊब चुका है। 50 साल के नायक और 20 साल की नायिका के बीच के विषम और असहज अंतरंग बस एक फरेब के सिवा और क्या है? मेधा के नाम पर बॉलीवुड के पास कॉपी और रिमेक है। अन्यथा सत्य तो यही है कि फिल्ममेकर्स यदि निष्ठा से समाज की सच्चाई को पर्दे पर लाएं, तो ओटीटी और लिंक उपलब्ध होते हुए भी लोग सीधे सिल्वर स्क्रीन पर देखने जाना पसंद करते हैं। न केवल जाना पसंद करते हैं, बल्कि एक जनआंदोलन बना देते हैं। बदलते हुए वक्त की यही यूएसपी है कि लोग सत्य तक स्वयं पूरी निष्ठा से पहुंचना चाह रहे हैं। हम भी कोशिश में हैं।
साभार
विशाल झा
टिप्पणियाँ
Nice attempt, everyone should pay their part to propagate truth
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