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द केरल स्टोरी भारत में लव जेहाद की वैक्सीन क्यों कहीं जा रही है जानने के लिए पढ़ें पूरी खबर

ये बहुत कम लोगों को पता होगा कि “द केरल स्टोरी” के लेखकों ने जब वहाँ के राज्य सरकार से आरटीआई के तहत यह जानकारी चाही कि केरल से अब तक कितनी हिंदू एवं ईसाई लड़कियाँ को सीरिया के आतंकी संगठन ISIS के लिए धर्मांतरित करके वहाँ के मौलानावों द्वारा सप्लाई किया गया तो पहले तो उन्होंने इसे बताने से इनकार कर दिया, बाद में दबाव पड़ने पर उन्होंने आरटीआई के जवाब में एक सरकारी वेबसाईट का नाम लिख दिया और कहा कि सारी जानकारी उस वेबसाइट पर उपलब्ध है। 

जब फ़िल्म के लेखकों ने उस वेबसाइट से जानकारी लेने का प्रयास किया तो पता चला कि सरकार ने उस वेबसाइट को इंटरनेट से ही हटा दिया था अथवा ऐसी कोई वेबसाइट पहले से थी ही नहीं। केरल के कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री का बयान है कि केरल से 32000 हिंदू ईसाई लड़कियों को वहाँ के मौलानाओं ने धर्मांतरित करके सीरिया के आतंकियों को सेक्स स्लेव बनाकर भेज दिया। फ़िल्म ऑथेंटिक न लगे इसके लिए सारे डेटा को वेबसाइट से हटा लिया गया। 

अब जब डेटा ही नहीं है तो शशि थरूर से लेकर ज़ुबैर गैंग तक सब इस फ़िल्म को प्रॉपगेंडा फ़िल्म बताने में लगे हैं। इस पूरे गिरोह से पूछा जाना चाहिए कि जब तुम लोगों को लग रहा है कि फ़िल्म में ग़लत बातें दिखाई जाने वाली हैं तो ख़ुद तुम लोग क्यों नहीं सारे डेटा को वहाँ के सरकार से सार्वजनिक कराते हो?
ज़ुबैर तो भारत में अप्रत्यक्ष तौर पर ISIS का एजेंट है, वह जिस व्यक्ति का नाम लेकर चीखने चिल्लाने लगता है उसका स्पष्ट मतलब यह होता है कि दुनिया भर के आतंकियों को सिग्नल चला गया कि अमुक व्यक्ति को हलाक करना है। नूपुर शर्मा के मामले में इसीलिए इतनी सावधानी बरती जा रही है क्यूँकि इसने सिग्नलिंग कर दी थी। इसलिए यदि यह फ़िल्म से जुड़े किसी व्यक्ति अथवा कलाकार को टार्गेट करके ट्वीट करे तो सरकार को तुरंत उस व्यक्ति अथवा कलाकार को सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए। 

यह पूरा गैंग इतना शातिर है कि इनमें आपस में फ़िज़िकल बातचीत की आवश्यकता नहीं पड़ती, केवल इशारा काफ़ी होता है, इसी कारण इतने मुक़दमे के बाद और हत्याओं को अंजाम देने के बाद भी कोर्ट द्वारा सुरक्षित हैं। 

द केरल स्टोरी भारत में लव जेहाद का वैक्सीन बनकर आ रही है। इसको स्वयं देखें, बच्चियों को दिखाइए, सम्भव हो तो दस बीस बच्चियों को स्पान्सर भी करिए।

साभार 
डॉ भूपेंद्र सिंह 
लोकसंस्कृतिविज्ञानी 


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