सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

यदि भारत एक मुस्लिम राष्ट्र बन जाए ,तो क्या होगा ?

  

      कभी कभी सोचता हूं कि यदि भारत एक मुस्लिम राष्ट्र बन जाए ,तो क्या होगा ?इसे समझने के लिए इतिहास में जाना होगा । भारत के समुद्रतटीय प्रदेशों में सातवीं शताब्दी के तीन मस्जिद मिलते हैं । गुजरात का बरवाड़ा मस्जिद (623 ई) ,केरल का चेरामन जुमा मस्जिद (629 ई) और तमिलनाडु का पलैया जुम्मा मस्जिद (630 ) मुहम्मद पैगम्बर के ही जीवनकाल में अरब व्यापारियों द्वारा बनाए गए थे। इन सारे मस्जिदों का निर्माण हिंदु राजाओं की ही अनुमति से किया गया था । उस समय भारत में किसी क्षेत्र पर मुसलमानों का आधिपत्य नहीं था ।
              राजा रणजीत सिंह और वीर शिवाजी द्वारा मस्जिद तोड़े गए थे क्या ?उत्तर है - नहीं ।
              लेकिन जब मुस्लिम सत्ता स्थापित हुई ,तब क्या हुआ ?सर्वविदित है कि मुस्लिम शासनकाल में मंदिर तोड़े गए -एक दो नहीं ,हजारों ।
                क्या यह उदाहरण हिंदु सत्ता और मुस्लिम सत्ता के अंतर को स्पष्ट नहीं करता है ?हिंदुओं के शासनकाल में मस्जिदों के ध्वस्त किए जाने का कोई प्रश्न ही नहीं है ।
                   कुछ मस्जिदों की पृष्ठभूमि में तोड़े गए मंदिरों के अवशेष मौजूद हैं ।उन्हें देखकर हिंदुओं के बीच आक्रोश तो पनपता है ,पर वैसा नहीं जैसा सल्तनत और मुगल काल में हिंदु मंदिरों के प्रति मुस्लिम शासकों में देखा जाता था । 
                        लोग बाबरी मस्जिद का उदाहरण देंगे ।लेकिन इसे भी समझना होगा कि श्री राम की जन्मभूमि का हिंदुओं के लिए वही महत्त्व है ,जो मुसलमानों के लिए मक्का और मदीना का है ।यदि मुसलमान मुहम्मद पैगम्बर का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते ,तो हिंदुओं से श्रीराम के अपमान को बर्दाश्त करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ?
       सच यह है कि मुसलमान भाजपा की सत्ता से इसलिए घबड़ा रहे हैं , क्योंकि उन्हें लगता है कि हिंदु राज्य की कल्पना करने वाली भाजपा के सत्ता में आते ही , उनके मजहब पर ग्रहण लग जाएगा ।ऐसा वे अपने मुस्लिम सत्ताधारियों के व्यवहार के आधार पर कल्पित कर रहे हैं ।लेकिन हिंदु सत्ताधारी मुस्लिम सत्ताधारियों की तरह भिन्न धर्मावलंबियों के प्रति क्रूर और अत्याचारी हो ही नहीं सकते ।
      मुसलमानों के सही शत्रु अपने को सेक्युलरिस्ट कहने वाले लोग हैं , क्योंकि कुरान शरीफ में सेक्युलरिज्म के विरुद्ध ही सीख दी गई है ।एक भी आयत बताओ जिसमें सेक्युलरिज्म का समर्थन किया गया हो और काफिरों के साथ बराबरी और सद्भाव के आधार पर जीने की बात कही गई हो ।हिंदुओं को इसीलिए तो सेक्युलरिज्म से दूर रहने की हिदायत दी जाती है , क्योंकि ताली एक हाथ से नहीं बजती ।

जय श्रीकृष्ण 

             साभार    
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी 
    सुधीर कुमार सिंह 
        


                   

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