सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

ये थी हमारी सनातनी आरक्षण की व्यवस्था

ये थी हमारी सनातनी आरक्षण की व्यवस्था....

सारा भ्रम दूर कर देगा ये पोस्ट, हर कोई गर्व करेगा हिन्दू होने पर, शायद जातिवाद भी कम हो जाए इसे पढ़कर, कि पीढ़ियों से आरक्षण किसके पास है...?

गहना बनाने का आरक्षण -- सुनार
हथियार बनाने का आरक्षण -- लोहार
पत्तल बनाने का आरक्षण -- बारी
सूप बनाने का आरक्षण -- धरिकार
नाव चलाने का आरक्षण -- मल्लाह
बर्तन बनाने का आरक्षण -- ठठेरा
कपड़े सिलने का आरक्षण -- दर्जी
फर्नीचर बनाने का आरक्षण -- बढ़ई
बाल काटने का आरक्षण -- नाई
ईंट बनाने का आरक्षण -- प्रजापति
मूर्ति बनाने का आरक्षण -- शिल्पकार
घर बनाने का आरक्षण -- राजमिस्त्री
तेल पेरने का आरक्षण -- तेली
पान बेचने का आरक्षण -- बरई
दूध बेचने का आरक्षण --- ग्वाला
मांस बेचने का आरक्षण -- खटिक
जूता बनाने का आरक्षण -- चर्मकार
माला बनाने का आरक्षण -- माली
मिठाई बनाने का आरक्षण -- हलवाई
टेक्सटाइल का आरक्षण -- दर्जी
चूड़ी का आरक्षण -- मनिहार
रियल सेक्टर का आरक्षण -- कुम्हार

क्या हजार साल से किसी सुनार ने लोहार को दामाद बनाकर उसको अपने आरक्षित व्यवसाय में घुसने दिया?

तो फिर आखिर आरक्षण का असली आनन्द कौन लिया?

जब हजारों साल से इन्ही पेशे से रोजगार लिया किसी को घुसने नही दिया, तो आज इस पेशे के कारण खुद को पिछड़ा क्यों कहते हो?

विचार करें ?

इन सारे सम्मानित व्यवसाइयों को आज संविधान ने पिछड़ा और अछूत बना दिया है।

सनातन धर्म में जब सरकारी नौकरी नहीं होती थी, तब सबको रोजगार दिया गया, फिर अन्याय कहाँ से हो गया?

क्षत्रियों का आरक्षण क्या था? जवानी में बलिदान होकर उनकी औरतों का विधवा होना, बच्चों का अनाथ होना। जो कोई भी नही करना चाहेगा, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया।

जाति मंदिरों में नहीं पूछी जाती है, लेकिन संविधान में पूछी जाती है, सरकारी नौकरी में पूछी जाती हैं, राशन, स्कालरशिप और हर संस्थानो में पूछी जाती है।

पहले के जमाने मे कमाने खाने के लिए सरकारी नौकरी तो होती नही थी।

ब्राह्मणों ने अपने लिए आरक्षण चुना भिक्षा माँगना और नि:शुल्क अध्यापन।

यही सब विभिन्न जातियों के व्यवसाय थे, जिससे भारत पूरी दुनिया में सोने की चिड़िया बना था। भारत को सोने की चिड़िया बनाने वाले पिछड़े कैसे हो गए?

ब्राह्मणों ने क्षत्रियों के हिस्से में बलिदान दिया और स्वयं ब्राह्मणों ने कई बार क्षत्रियों के साथ मिलकर त्याग और बलिदान किया।

इसके बाद भी अपने हिस्से में भिक्षाटन ही रखा, तो फिर उन्होंने जाति व्यवस्था में अन्याय कैसे किया, क्या कोई बताएगा?

जय जय श्रीराम 🌺🙏
साभार 
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प्रतीकात्मक तस्वीर 

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