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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Shivam Patel
को
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राहुल का कैम्ब्रिज लेक्चर पार्ट -१
तो प्रारम्भ होता है एक सामान्य प्रक्रिया के हिसाब से 'धन्यवाद प्रस्ताव के साथ'| " Before start, I would like to thank University of Cambridge. I studied here, It gave me a lot in terms of knowledge and in terms of understanding.
यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है कि मैं यहां हूं, जिन्होने बुलाया उनका आभार प्रकट करते हुए| "
आगे... Introductory part of speech है, जिसमे राहुल बता रहा है कि वह यहां किन मुद्दो पर बात करेगा|
"मै भारत और भारत में क्या हो रहा है, पर चर्चा करूंगा भारत जोड़ो यात्रा के आधार पर|"
अरे राहुल बाबा तुमने यात्रा में किया ही क्या, देश तोड़ने वालो के साथ तस्वीरे खिंचाकर पंचमक्कारी के सिवा| पहला तो भारत दर्शन के मामले में तुम अभी भी अपरिपक्व बालक हो तुम्हे जरूरत है सीखने की, भारत भृमण के बावजूद तुम भारतीय संस्कृति नहीं समझ पाये, भारत को नहीं समझ पाया, क्योंकि कारण साफ है देशाटन से सीखना है तो चमचो को तजकर ही सम्भव है पर तुम्हे तो सारा ज्ञान चम्मचो से ही लेना, आम जन के साथ , सामान्य व्यक्ति जैसे रहना तुम्हारी शान में गुस्ताखी होगी, चचा लग्जरियस वाहनो में सवारी करके तुम सोंचते हो कि तुमने भारत को जान लिया है, तो मैं स्पष्ट कहुंगा बिल्कुल नहीं |
आगे राहुल बता रहें हैं कि प्लानेट में 2 ही पर्सपेक्टिव हैं देखने के चाउनीज view और अमेरिकन view, हम इन दोनो दर्शन के तरीको पर क्या सोंचते हैं, यह कैसे प्लान हो रहे हैं, कैसे काम कर रहा है इत्यादि|
तो राहुल बाबा वर्तमान विश्व में एक तीसरा view of thinking also exits, जो भारतीय पर्सपेक्टिव है, आज विश्व समुदाय भारत के view को चीन के ऊपर महत्ता दे रहा है, पर इस 52 वर्षीय असमझ युवा चीन को ही बाप बताएगा | यह चीन प्रेम नया नहीं है|
अब राहुल अगली चर्चा का विषय है, कि केन्द्रीय भय क्या है? "listening व्यक्तिगत और राजनीतिक, करोड़ो लोग का, कैसे वह महसूस करते हैं, या सोंचते हैं|
और कुछ अन्य संस्कृतियों को देखेंगे कैसे वह काम करते हैं , कहां से वह आते हैं, जिन्हे हम फालो नहीं करते| और इन सबका broad idea is listening.
विभिन्न संस्कृतियां विभिन्न तरीको से listen करते हैं ,पर मैं विशेषतः भारत की बात करूंगा|"
"भारत जोड़ो के अनुभवों से शुरू करते हैं, सभी ने न्यूज के माध्यम से सुना है कि भारतीय लोकतंत्र खतरे में है| एक विपक्ष का नेता होने के नाते मैं देखता हूं कि वहां (भारत में ) क्यँ हो रहा है|"
अब यहां पर राहुल पता नहीं कौन से भारत से आते हैं, मुझे शक है कि कहीं वह कोई यमपुरी में उपस्थित किसी सुदुर देश जिसका संयोग वश नाम भारत हो सकता है, उसकी बात तो नहीं कर रहे, क्योंकि आजकल वह खुद कहते हैं वह राहुल गांधी नहीं हैं| सर ने भारत जोड़ो के आधार पर कहा, पर न्यूज की कटिंग दिखाया चम्मचो द्वारा प्रस्तोत जो वह खुद से लिख कर इसे दिखा देते हैं| क्योंकि जमीनी हकीकत कुछ और है, भारत में सबकुछ लोकतांत्रिक तरीके से ही हो रहा है|
यह भी हो सकता है, राहुल अपने घर को ही पार्लियामेंट समझ रहा हो, और अपने चम्मचों को मेंम्बर आफ पार्लियामेंट, घर के सदस्यों के देश का सर्वेसर्वा, और जो अचानक से Out or control from gandhi family. तो तो यह भी हो सकता है आपने देखा ही होगा, 'मेरा वचन ही है शासन'| पहले सौनिया जी राजमाता थी, फिर modi aya and thrown out Mother of democracy(Rajmata) from the decision making and control कमेटी, अतः दर्द स्वाभाविकक है| अरे रगहुल भाई Now, In india there is democracy, its not maunmohan time where your Rajmata decides कि क्या पालिसी होगी, सरकार क्या करेगी, It's modi's time, where tha people of Bharat decides, what to do, not your family. may be this is the reason, why Indian democracy under thread, ac. to Rahul.
आगे माननीय चंद्रचूण वाली मुद्रा में, श्री ज्ञानी राहुल बाबा " institutional framework जो लोकतंत्र के लिए जरूरी हैं, वो हैं- संसद, स्वतंत्र प्रेस, स्वतंत्र न्यायपालिका , just an idea of mobilization and idea of moving around, यह सब आवश्यक तत्व हैं| अतः हम भारतीय लोकतंत्र के मूल धांचे पर हमले का सामना कर रहे हैं|"
तो मिस्टर राहुल बाबा, तनिक अपने ज्ञान चक्षु खोलिए 2014 में जब एक प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का ईंटरव्यू काट-पीटकर आपकी कांग्रेसी सरकार ने दिखाया| था| अर्नब को जेल में आपकी समर्थित सरकार ने जेल में डाला| शायद ही कोई देश होगा जहां भारत के इतनी प्रेस फ्रीडम होगी| रवीश, बरखा, अंजुम, सरदेशाईं, रणविजय, अरफा, और भी बहुत सारे बड़े बड़े एंकर्स हैं, NDTV जैसे पूरे पूरे चैनल जो रात दिन भाजपा और भारत सरकार को कोसते रहते हैं, क्रीटिसाईज करते हैं और तो और स्वतंत्रता नहीं नहीं यह भी कहते हैं गरियाते हुए| अब वह बात अलग है कि राहुल गांधी को बीबीसी के भृष्टाचार ,ndtv के मालिको के भृष्टाचार की जांच करना फ्री प्रेस पर हमला मानते हों, वैसे भी राहुल जी इस गृह के निवासी नहीं हैं उन्होने खुद ही कहा है मैं नहीं कह रहा|
अब आगे स्वतंत्र न्यायपालिका पर हमले की बात की गयी है, सर जस्टिस चंद्रचूण का लेटेस्ट फैसला ही देख लो, न्यायपालिका कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र पर अतिक्रमण कर रही है| इससे अच्छा उदाहरण क्या हो सकता है, फ्री न्यायपालिका का| संसद द्वारा पास और राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित कानून को भी हमारे कोर्ट ने रद्द किया, ये तो संसद के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण था|
अब अगला टापिक Idea of Mobilization या Idea of Moving around,
राहुल बाबा अब पब्लिक पढ़ी लिखी हो गयी है, तुम्हारे झूठ पर वोट नहीं करना चाहती तो यह सरकार या भाजपा की गलती नहीं है| यह आपकी घटिया सोंच का परिणाम है|
तो स्पष्ट भारतीय लोकतंत्र पर कोई खतरा नहीं है, कोई हमला नहीं झेल रहा, राहुल जिस भारतीय लोकतंत्र पर हमले की बात कर रहे हैं, वह असल में प्रथ्वी गृह वाले भारत की बात नहीं कर रहे|
"India राज्यो के संघ के रूप में वर्णित है, इस संघ के लिए नेगोसिएसन और कम्यूनिकेसन आवश्यक है, अलग अलग बहुत सी स्टेज हैं, और युरोप से बहुत बड़ा ह, अतः अधिक फारवार्ड वार्तालाप की आवश्यकता है| और यह नेगोसिएसन और कम्यूनिकेसन वास्तव में थ्रेड और अटैक को अंतर्गत है| "
राहुल बाबा पता नहीं किस कम्यूनिकेसन और नेगोसिएसन की बात कर रहा है, जबकि आए दिन प्रधानमंत्री जी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वार्तालाप करते हैं, और समाधान होता है| मुझे लगता है राहुल खुद को कहीं प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तो नहीं मानते जो वह अपनी बात बता रहे हैं|
अब आगे एक पिक दिखाते हुए, "यह पिक आप देख सकते हैं, जो संसद के समक्ष ली गयी है जहां पर सम्पूर्ण विपक्ष के संसद खड़े हैं, और आवश्यक मामलो पर चर्चा कर हैं, हमें घेर लिया जाता है, जेल में डाल दिया जाता है, जो 3-4 बार हो चुका है| और यह रिलेटिवली हिंसक था, यह एक उदाहरण है लोकतंत्र में हमले का"
यहां पर राहुल खुद को ही लोकतंत्र मान रहे हैं , और जो पिक है वह मुझे नहीं मिली, पर इसे जब अरेस्ट करा गया था वह जब इनकी जांच हो रही थी, तब इसने संसद के सामने खुद के भ्रष्टाचार की जांच से बचने का ड्रामा था|
दूसरा प्वाईंट है संसद में चर्चा का, तो राहुल बाबा जब चर्चा होती है तब या तो आप थाईलैंड में मसाज करा रहे होते हैं या फिर शोरगुल| अभी राष्ट्रपति महोदया के अभिभाषण पर परिचर्चा के दौरान शियारो जैसे हुवाने की आवाज संसद से आती थी, विपक्ष गांवो में शियारो जैसे हुवाने से भी बदतर है, हुवाने को ही चर्चा समझ रहे हो तो अलग बात है|
आगे,,,
"आपने भी सुना होगा , अल्पसंख्यको पर हमले को, प्रेस पर हमले को अतः आप एक विचार कर सकते हैं क्या हो रहा है|"
अरे सरजी जम्मू काश्मीर में हजारो हिन्दुओ को मारकर भगा दिया गया, बंगाल में हिन्दू मारे जा रहे हैं, नूपूर मामले में हिंदुओं पर हिंसा देखा है, आस पड़ोस के सभी मुस्लिम भारत में आना चाहते हैं, वो 50 से अधिक मुस्लिम देश होने के बावजूद फिर भी अल्पसंख्यक खतरे में है, गजब है राहुल बाबा का ज्ञान| सबसे अधिक सरकारी लाभ पाने वाला वर्ग मुस्लिम है पिछले 8 वर्षो में, फिर भी खतरे में हैं| आए दिन हिंदू इस्लामिक जेहाद की भेंट चढ़ जाते हैं पर अल्पसंख्यक खतरे में हैं|
आगे राहुल बाबा " मैं विचार करना चाहूंगा, भारतीय लोकतंत्र में बिगेस्ट डेमोक्रेसी है, 50% लोग जो डेमोक्रटिक एरिआ में हैं| अतः भारतीय लोकतंत्र का संरक्षण और बचाव भारत के लिए अधिक खतरनाक है|
यह वास्तव में प्लानेट को लोकतंत्र को बचाने के बारे में है|"
क्या है कि यहां पर राहुल बाबॎ दार्शनिक हो गये हैं, वैसे आजकल वह कब क्या हो जाएं किसी को पता नहीं चलता| और दार्शनिक रूप में वह ओबामा द्वारा वर्णित अपरिपक्व बालक के जैसे ही हैं|
(यह राहुल के प्रारम्भ के 4 मिनट और पहली स्लाईड का व्यंग्यात्मक विश्लेषण है, अगला पार्ट आज रात्रि तक )
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