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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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बीजने पर मजबूर करता है । जैसे पंजाब में केवल गेहूं और धान के MSP होने के कारण ही किसान को गेहूं और धान बोने पर मजबूर होना पड़ता है ।और किसी अन्य फसल की सरकार द्वारा खरीद ना होने के कारण,किसान लगातार बार बार एक ही तरह की फसल बीजता रहता है । किसान को समझना पड़ेगा कि MSP सरकार किसानों को नहीं,बल्कि पूंजीपति कम्पनियों को देती है । ताकि किसान मिश्रित खेती से दूर रहे। और किसान को उर्वरक, बीज आदि बाजार से खरीदने पड़ें ।सरकार अगर किसानो का भला चाहती है ,तो सरकार को चाहिए कि जितनी सब्सिडी वह किसानों पर 1 साल में खर्च करती है, वह किसानों के खातों में सीधा ट्रांसफर करें। जैसे कि मान लो एक किसान के हिस्से में 10000 रुपए मासिक आते हैं ।तो सरकार को चाहिए कि ₹10000 महीना किसान के खाते में सीधा ट्रांसफर करें । और सरकार फालतू में किसान को मजबूर ना करें कि वह वही फसलें बार बार बीजें । जिससे की सारी की सारी कृषि पूंजीवादी कंपनियों पर निर्भर हो जाए। जैसे कि आजकल की सारी कृषि पूंजीवादी कंपनियों पर निर्भर है । किसान भाइयों कभी आपने सोचा है? कि आपके पूर्वज जोकि मिश्रित जैविक खेती करते थे। उन पर ना तो क़र्ज़ था,ना ही वे बीमार थे,ना ही उन्होंने कभी आत्म हत्या की ,ना ही उनको खेत छोड़कर शहरों और विदेशों में भागना पड़ा ।आजकल के किसान को सस्ता क़र्ज़ भी मिलता है ।MSP भी मिलती है । उर्वरक पर अनुदान भी मिलता है ।लेकिन फिर भी किसान आत्म हत्या पर मजबूर और क़र्ज़ के बोझ तले दबा क्यों हैं ।किसान भाईयों जब बैंक ट्रेक्टर आदि पर कम ब्याज लेता है ।और इस पर सरकार SUBSIDY देती है ।तो यह सब्सिडी किसान के लिए नहीं ।बल्कि ट्रेक्टर कम्पनीयों के लिए होती है ।जब सरकार यूरिया आदि पर सब्सिडी देती है। तो वो किसानों के लिए नहीं , बल्कि वह यूरिया कम्पनीयों के लिए होती है ।सरकार कभी बैल खरीदने पर , जैविक खेती पर सब्सिडी क्यों नहीं देती ।आप को इस बात को समझना होगा ।आपको मिश्रित जैविक खेती की और लौटना होगा ।खेती की लागत कम करनी होगी । अपनी उपज सीधे उपभोगता तक पहुंचानी होगी ।और पूंजीवादी बिचोलियों को खत्म करना होगा ।नहीं तो खेती छोड़कर शहर में मजदूरी करनी् पड़ेगी । पूंजीवादी बिचोलियों को ख़त्म करने के लिए सनातन अर्थव्यवस्था फिर से पुनर्जीवित हो रही है
साभार
राजीव कुमार जी
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