सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

Political Correctness vs भड़काऊ लेखन/भाषण:



कुछ समय पहले किसी ज्ञानी से बात हो रही थी। सोशल मीडिया को लेकर उन्होंने एक बहुत ही अच्छी बात कही जो आपसे share कर रहा हूँ: 

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया या किसी पब्लिक फोरम में भड़काऊ लिखना-बोलना बहुत आसान होता है लेकिन इसे बोलने/लिखने वाले एक महत्वपूर्ण बात भूल जाते हैं। वो ये अनुमान नहीं लगा पाते कि उन्हें सुनने वालों में विभिन्न प्रकार के लोग होते हैं। 

कुछ समझदार लोग सबकुछ सुनकर पचा लेते हैं और जितना आवश्यक हो उतना ही प्रयोग में लाते हैं। लेकिन कई होते हैं जिन्हें ये पता नहीं होता कि गाड़ी को किस gear में भगाना है। उत्तेजक, भड़काऊ, तड़कते-भड़कते लेखों को पढ़ कर न जाने कितने ऐसी दिशा में निकल पड़ते हैं, जिधर आगे जाकर अफसोस ही होता है। इसका नुकसान सबसे अधिक युवा वर्ग को होता है जिनके energy को channelise करके उल्टी दिशा में मोड़ दिया जाता है। 

इन सबका अंत युवा अपने career में एक भयंकर भूल करके समझता है। अगर आपका कोई युवा बेटा, बेटी,भाई, बहन होगा तो आप समझ जायेंगे मैं क्या कहने का प्रयास कर रहा हूँ। बात-बात पर हिंसा को एकमात्र उपाय बताने वाले सबसे पहले अपने परिवार को ही इनसे दूर करते हैं। 

*********

मैं सोशल मीडिया की ताकत समझता हूँ। मुझे पता है मेरा लिखा या बोला हुआ वापस घूम कर एकदिन मेरे पास ही आयेगा। इस कारण से मैं ऐसा कुछ भी लिखने/बोलने से बचता हूँ जो मैं स्वयं के परिवार के लिये नहीं चाहूँगा। एक नागरिक होने के नाते, अपने राष्ट्र के भाई-बहनों के लिये इतना तो कर ही सकता हूँ। 

इस विषय पर मैं प्रख्यात अधिवक्ता श्री Vepa Sarathi जी की पुस्तक Interpretation of Statutes से एक बात quote करूँगा:

“The duty of a draftsmen of legal texts is to try imagine every possible combination of circumstances to which his words might not apply and every conceivable misinterpretation that may be put on them, and to take precautions accordingly…”

अर्थात, जो कानून लिखते हैं उन्हें अपने शब्दों का विशेष ध्यान रखना चाहिये। उन्हें हर तरह की संभावना पर विचार करना चाहिये जिसमें उनके शब्दों का सही के साथ गलत प्रयोग भी किया जा सकता है। 

सीखना चाहें तो इससे बहुत कुछ सीख सकते हैं।

शेष किसी और माध्यम से…


टिप्पणियाँ