सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

अगर किसी मुर्दे से बेटा मांगोगे तो गारंटेड शैतान ही जन्म लेगा आपके घर में.कोई संत थोड़े न पैदा होगा!

                           प्रतीकात्मक तस्वीर  


ये मेरा 35 वर्षों का अनुभूत तजुर्बा बता रहा है जिसमें मैंने अपनी ओर से कुछ नहीं एड किया है!बस आपबीती बताई है!
हो भी क्यों नहीं मित्रों!जब परेशान मां मुझ तक थके मांदे पैर और धूल धूसरित आशा लेकर पहुंचती है यह बताते हुए कि"अच्छा भला बेटा शराबी हो चुका है,हिंसक व्यवहार है उसका! गाली गलौज उसके व्यक्तित्व का हिस्सा है!बस आपसे ही आशा है कृपया उसको लाइन पर ले आओ ताकि हमारा बचा जीवन तो कम से कम आराम से बीते"!
मेरे इस रहस्योद्घाटन पर कि आप उसके जन्म से पूर्व फलां फलां ज्यारत या मजार पर गईं थीं बेटा पैदा होने की दुआ मांगने?
तो बंदी इसका इल्जाम भी अपनी सास पर ही रख देगी कि हम तो उस वक्त नए नए शादीशुदा थे!अक्ल थी नहीं सो आ गए बहकावे में और गर्भावस्था की हालत में ही पहुंच गए बेअक्ल सास संग हाजी कल्लन की मजार पर!!
अब सुधिजनों आप ही फैसला करो किसकी गलती है इस सबमें?
बेटे की चाहत वाली दादी की??..या बेटा देकर कुल खानदान में नाम कमाने की चाहत रखने वाली मां की??
सर्वशक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना करने में शर्म आती है और उस मुर्दे की मजार पर जाने में कौनो शर्म नहीं जो खुद कभी न कभी भगवान के आशीर्वाद से जन्मा है!जिसका यह भी पता नहीं अपनी जवानी में स्वयं कितना बड़ा पापी कलंकी रह चुका है??कितने सनातनियों के खून के छींटे हैं उसके कपड़ों पर??जिस धर्म में यह अकीदा है कि काफिर का कत्ल करने से रूह को जन्नत नसीब होती है उसकी मजार पर इतने जनजागरण के बावजूद हमारी सास बहुएं आज भी बदस्तूर बेटे की चाहत और घर की शांति की कामना ले लेकर अपना माथा फोड़ रहीं हैं!!
मेरा आज तक का तजुर्बा है अगर हमारी कोई भी काफिर मां बहन गर्भावस्था की हालत में जियारत या मजार पर जायेगी तो सौ प्रतिशत किसी न किसी जिन्न से पीड़ित होकर लौटेगी!क्योंकि हमारे पवित्र मंदिरों जैसा शैतान बंधन उन मजारों पर नहीं किया जाता जिससे वहां घूम रहीं कुख्यात बलात्कारी आत्माएं फौरन उन मासूम मां के जिस्म में प्रवेश कर जाती हैं और फिर शुरू होता जीवन भर चलने वाला भयानक कुचक्र जिससे वे कभी आजाद नहीं पातीं!!

इस सारे किस्से का दुखद पहलू यह है कि जिस शैतान को जन्म देने की प्रक्रिया में उन्होंने नौ माह लगाएं हैं बस मेरे यहां पहुंचते हैं तीन मिनट में उनको आराम चाहिए!और आराम न मिलने की हालत में पुनः उन्हीं शैतान की मजारों में जाकर शैतान को खत्म करने का फातिहा पड़ना! वहां नौ माह तक जियारत पर माथा फोड़ना और यहां तीन माह का भी सब्र नहीं!
उफ्फ!कितना दुखद है यह सब??इस दर्द को अनुभव कीजिए मित्रों और अपनी गैरहाजिरी में कुख्यात मजारों पर जाती अपनी भोली स्त्रियों पर नजर रखिए!कहीं आपके घर में भी तो कहीं अगला शैतान जन्म नहीं ले रहा आपकी लापरवाही से??आमीन!!


किशोर बाल्मिकी
8077748528

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