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सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।
साई बाबा तब तक अच्छे थे जब तक उसके कमेटी में कांग्रेस के लोग थे, जैसे ही फड़नवीस सरकार में ट्रस्ट के भीतर संघ से जुड़े लोगों को डाल दिया, वह मुल्ला कसाई हो गये। बिरियानी खिलाने वाले हो गए।
प्रस्तुतकर्ता
Deepak Kumar Dwivedi
को
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वस्तुतः आज के जमाने में सभी बातें पैसे से जुड़ी हुई हैं। साई बाबा पर दुखी होने वाला शंकराचार्य गिरोह हिंदू आतंकवाद शब्द को गढ़ने वाले दिग्विजय सिंह का हमेशा ग़ुलाम रहा। वहीं जिस समय भूपेश बघेल के पिता ने भगवान राम को गालियाँ दी थी और लोग आंदोलित थे, ठीक उसी समय शंकराचार्य गिरोह ने उनसे दस एकड़ ज़मीन दान में लेकर मामले को रफ़ादफ़ा करा दिया। अधिकांश हिंदू समाज अपने धर्माचार्यों के इस आर्थिक एंगल से अनभिज्ञ है।
काशी विश्वनाथ कारिडोर की कमान अविमुक्तेश्वरानंद के गिरोह के पास नहीं गया तो वह सुंदर स्थान उनको बिलकुल अच्छा नहीं लग रहा। वहाँ श्रद्धालुओं के लिए बढ़ती व्यवस्थाएँ आँखों में सुख देने के बजाय उल्टा चुभ रहा है। इसी तरह राम मंदिर निर्माण से भी शंकराचार्य गिरोह नाराज़ है और अंत में गिरोह ने कह भी दिया कि सरकार आख़िर क्यूँ उसकी व्यवस्था में शामिल है? क़ायदे से हम जिन आचार्यों को कह रहे हैं उनको व्यवस्था सौंपा जाय। इसके पीछे का कारण है कि वहाँ से धनप्राप्ति हो सके। जैसे अन्य जगहों पर पंडा गिरोह लूट खसोट मचाये हुए है उसको राम मंदिर में भी स्थापित किया जा सके। लेकिन सरकार नहीं मानी। मानना भी नहीं चाहिए।
इसलिए धर्माचार्यों की बातों को सुनने और समझने से पहले इस आर्थिक एंगल की जाँच अवश्य कर लें। आप हिंदुवादी हैं तो हिंदुओं की चिंता करिए। वह रहेंगे, तो बाबा बीबी भी रहेंगे।
डॉ भूपेंद्र सिंह जी
लोक संस्कृति विज्ञानी
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