सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

ब्रह्माण बनिया भारत छोड़ो का नारा देने वाले गिरोह का सच क्या है ?



जो आज ब्राह्मण बनिया भारत छोड़ो कह रहे हैं उन्होंने इतिहास वर्तमान सबसे अवगत कराना चाहता हूं । ब्राह्मण समाज भारत की आत्मा है । ब्रह्माण करोड़ों वर्षों से पथप्रदर्शक समाज है रहा है हर संकट घड़ी में सामने आया है उस समाज को भारत छोड़ने की बात करते हैं । ब्रह्माण को जाति नहीं एक विचारधारा है जो शुद्धता यम नियम आचार व्यवहार ज्ञान की परंपरा को संरक्षित रखना सिखलती है ब्रह्माण समाज को निशाने लेने की मानसिक विकृति आज की नहीं है लाखों वर्षों से चली रही यह असुरी विकृति है । क्योंकि असुर जानते हैं जो ब्रह्माण कर्मकाण्ड करते हैं उससे देवताओं का शक्ति मिलती है आधुनिक संदर्भ में समझे ब्रह्माण समाज ज्ञान से समाज राष्ट्र का ही कल्याण होता है । जो ब्रह्माण समाप्त हो गये हिंदू समाज हजारों टूकडों विभाजित होकर कट के मर जाएगा भारत के हजार टुकड़े हो जाएंगे । ब्राह्मण के साथ बनियों को निशाने पर इसलिए क्योंकि अंग्रेजों ने जो नीति बनाई थी उससे भारतवर्ष लघु उद्योग कुटीर उद्योग और वस्तुकला पूरी तरह से नष्ट हो गयी । उस नीति को कांग्रेस ने 1990 तक आगे बढ़ाया था। मजबूरी में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय नरसिम्हा राव जी ने आर्थिक सुधार करके बाजार को खोल दिया है जिससे समाजवादी नीतियों से देश मुक्त मिली व्यापार जगत खुली हवा में सांस लेने शुरू हुआ , भारतीय इतिहास में आर्थिक मोर्चे में सरकार ने व्यापारिक जगत और उद्यमियों को प्रोत्साहन देना शुरू किया । जिसके कारण भारत के व्यापार जगत नव ऊर्जा संचार हुआ । स्टार्टअप कल्चर विकसित होना शुरू हुआ बड़े आर्थिक सुधारों लागू किया PLI जैसी योजनाओं से विदेशी निवेश भी बढ़ रहा है। भारत की निजी कंपनियां का मार्केट कैप बढ़ रहा है और एक जिला एक उत्पाद जैसी योजनाओं से विकेंद्रीकरण को बढ़ावा मिल रहा जिससे कुटीर उद्योग वस्तुकला उद्योगों को भी लाभ हो रहा है , जिससे यह लगने लग गया 15 से 20 वर्ष भारत दुनिया दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा हैं । इसके कारण ब्रेकिंग इंडिया फोर्सस की बौखलाहट बढ़ती जा रही है । इन सब कार्यों में ब्रह्माण बनिया समाज की बहुत अहम भूमिका रही है । इसलिए यह गिरोह अनुसूचित जाति आंदोलन के नाम पर ब्रह्माण बनियों पर निशाना बना रहा है।  

बात वर्तमान की हो गई अब बात इतिहास की करते हैं । ब्रह्माण समाज ने हर संकट घड़ी में अपना सर्वस्व समर्पित कर करने वाला समाज रहा है । चाहे असुरों को अंत के लिए महर्षि दधीचि जी ने अपने हड्डियों का दान कर दिया। चाहे दुनिया को ज्ञान मार्ग दिखलाने और में ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए ब्रह्माण समाज योगदान को नहीं भूल सकते । साथ में बनिया समाज योगदान को नहीं भूल सकते हैं । जिसके कारण दुनिया ने व्यापार करना सीखा है इन्ही बनियों कारण भारत लाखों वर्ष तक दुनिया पर प्रभाव बना रहा है । यह वही ब्रह्माण आचार्य चाणक्य थे जिसने अखण्ड भारत की संकल्पना को साकार किया था वह चाहते तो वह भारत के स्वयं सम्राट बन सकते थे । फिर भी उसने एक वनवासी को चन्द्रगुप्त को सम्राट बनाया है । यह वही ब्रह्माण है परशुराम है  जो क्षत्रियों के अंहकार मर्दन के लिए शस्त्र भी धारण किया था यह वही ब्रह्माण पुष्यमित्र शुंग हो या राजा दाहिर या बाजीराव पेशवा हो धर्म रक्षा के लिए शस्त्र भी धारण किया है । यह वही ब्राह्मण जब धर्म पर वैचारिक रूप से संकट आया तो यह गौतम ऋषि बनकर न्याय सूत्र की रचना की दुनिया को न्याय आचार व्यवहार का अर्थ समझया है । यह वही ब्रह्माण है जिसने वाल्मीकि रामायण जैसे महाकाव्य रचना करके दुनिया को श्री राम की मर्यादा भान कराया । जिसका अनुसरण आज का भी समाज कर रहा है । यह वही ब्रह्माण है जिसने धर्म पर संकट आने पर शंकर से आचार्य शंकराचार्य बन जाते हैं 8 वर्ष की आयु में अपनी मां इकलौते बेटे होते हुए फिर संन्यास ग्रहण करके दुनिया अद्वैत मंत्र देते हैं । यह वह ब्राह्मण कुमारिल भट्ट है जिसने धर्म के लिए सबकुछ अर्पित कर दिया बौद्धो शास्त्रार्थ पराजित करके धर्म की लांज रखी थी , और बौद्धों से भारत को मुक्त कराया था उन्ही कारण गर्व आज हिंदू कह पा रहे हैं । यह वह आर्यभट्ट ब्राह्मण है जिसने दुनिया को शून्य दिया यह वह ब्राह्मण कणाद है जिसने दुनिया को परमाणु से परिचय कराया यह वह वराहमिहिर जिसने दुनिया को पहली बार ग्रह नक्षत्रों के बारे में बतलाया है यह ब्राह्मण पाणिनी है जिसने संस्कृत भाषा व्याकरण देकर जो दुनिया को भाषा ज्ञान दिया। यह वह ब्राह्मण जिसने अपने हित की चिंता किए बिना अपना सर्वस्व देश समाज के लिए समर्पित कर दिया। ब्राह्मण समाज पर जो आरोप लगाते हैं कि ब्राह्मण ने शोषण कर दिया गया वह सुदामा भूल जाते हैं जिसके मित्र भगवान श्री कृष्ण थे उनसे कह देते हीरा मोती मणि सोना चांदी से उनकी झोली भर देते हैं । फिर भी उन्होंने भिक्षा मांगना उचित समझा आपने स्वाभिमान से किसी प्रकार से समझौता नहीं किया है । यह ब्रह्माण आज तक पालन कर रहा है उस ब्रह्माण पर निशाना लगाना है आसान है ब्राह्मण जैसा बनना मुश्किल है भगवान श्री कृष्ण गीता में कहते हैं ।
चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः।

तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम्।।4.13।।
 
अर्थात मेरे द्वारा गुणों और कर्मोंके विभागपूर्वक चारों वर्णोंकी रचना की गयी है। उस-(सृष्टि-रचना आदि-) का कर्ता होनेपर भी मुझ अव्यय रमेश्वरको तू अकर्ता जान। कारण कि कर्मोंके फलमें मेरी स्पृहा नहीं है, इसलिये मुझे कर्म लिप्त नहीं करते। इस प्रकार जो मुझे तत्त्वसे जान लेता है, वह भी कर्मोंसे नहीं बँधता। 

शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च।

ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्।।१७.४२2।। 

अर्थात 
।वे कर्म कौनसे हैं यह बतलाया जाता है --, जिनके अर्थकी व्याख्या पहले की जा चुकी है वे शम और दम तथा पहले कहा हुआ शारीरिकादिभेदसे तीन प्रकारका तप? एवं पूर्वोक्त ( दो प्रकारका ) शौच? क्षान्तिक्षमा? आर्जवअन्तःकरणकी सरलता तथा ज्ञान? विज्ञान और आस्तिकता अर्थात् शास्त्रके वचनोंमें श्रद्धा विश्वास -- ये सब ब्राह्मणके स्वाभाविक कर्म हैं अर्थात् ब्राह्मणजातिके कर्म हैं। जो बात स्वभावजन्य गुणोंसे कर्म विभक्त किये गये हैं इस वाक्यसे कही थी? वही यहाँ स्वभावजम् पदसे कही गयी है। 
शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्। 

कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यं वैश्यकर्म स्वभावजम्।

परिचर्यात्मकं कर्म शूद्रस्यापि स्वभावजम्।।१८.५५।। 

अर्थात कृषि? गोरक्षा और वाणिज्य -- भूमिमें हल चलानेका नाम कृषि है? गौओंकी रक्षा करनेवाला गोरक्ष है? उसका भाव गौरक्ष्य यानी पशुओंको पालना है तथा क्रयविक्रयरूप वणिक् कर्मका नाम वाणिज्य है ये तीनों वैश्यकर्म हैं अर्थात् वैश्यजातिके स्वाभाविक कर्म हैं। वैसे ही शूद्रका भी? परिचर्यात्मक अर्थात् सेवारूप कर्म? स्वाभाविक है। जातिके उद्देश्यसे कहे हुए इन कर्मोंका भलीप्रकार अनुष्ठान किये जानेपर स्वर्गकी प्राप्तिरूप स्वाभाविक फल होता है। क्योंकि अपने कर्मोंमें तत्पर हुए वर्णाश्रमावलम्बी मरकर? परलोकमें कर्मोंका फल भोगकर? बचे हुए कर्मफलके अनुसार श्रेष्ठ देश? काल? जाति? कुल? धर्म? आयु? विद्या? आचार? धन? सुख और मेधा आदिसे युक्त? जन्म ग्रहण करते हैं इत्यादि स्मृतिवचन हैं और पुराणमें भी वर्णाश्रमियोंके लिये अलगअलग लोकप्राप्तिरूप फलभेद बतलाया गया है।  

ब्राह्मण कोई जन्म से नहीं होता है ब्राह्मण कर्म से ब्राह्मण होता है उसी प्रकार से वैश्य है उन्होंने राष्ट्र की हर मुश्किल घड़ी में सेवा की है ब्राह्मण भारत का बौद्धिक बल है तो वैश्य या बनिया भारत आर्थिक वैभव और ऐश्वर्य धन रुपी लक्ष्मी है जैसे दिमाग को शरीर से अलग करेंगे शरीर काम करना बंद कर देगा । उसी प्रकार धन को समाप्त कर देंगे भुखे मर जाएंगे क्योंकि बनिया   दुनिया भर के करोड़ों लोगों का पेट पालता है । हर व्यापार करने वाला व्यक्ति किसी जाति या धर्म का हो वह कर्म से बनिया हो जाता है । जिन  मूढ़ो को लगता है ब्राह्मण बनिया को बाहर कर देंगे वह एक बार एक बार प्रयास करके देख सकते हैं । वह स्वयं समाप्त हो जाएगे ब्राह्मण बनिया को समाप्त नहीं कर पाएंगे । यह निम्न कोटि अर्बन नक्सली इन लोगों बुद्धि कहा है क्योंकि इन लोगों समनता समाजवाद चरस इस तरह फूंक ली है । इन्हें कुछ भी दिखाई नहीं देता है सिर्फ हंसिया हथौड़ा वामपंथी विचार दिखाई देता है । प्रकृति का नियम भिन्नता को एक शरीर अलग अंग होते हैं जैसे महिला पुरुष एक समान नहीं हो सकते है । उसी तरह गुण कर्म एक समान नहीं हो सकते हैं। उस तरह हर व्यक्ति राजा नहीं हो सकता है हर व्यक्ति रंक नहीं हो सकता है । फिर कर्म परिश्रम के बल पर मनुष्य या हर प्राणी कुछ भी कर सकता है । यही वर्ण व्यवस्था का सिद्धांत है । वर्ण व्यवस्था समझ नहीं आए तो आधुनिक वर्ग सिद्धांत क्लास सिद्धांत समझे उसमें में चार श्रेणी उच्चम वर्ग उच्च वर्ग निम्न वर्ग अंत गरीब आता है उसमे अमीर और मजदूर में स्पष्ट अंतर है उसमें प्रधानमंत्री और सफाई कर्मी अंतर स्पष्ट परिलक्षित होता है । फिर मूढ़ कालमार्क्स चेलों क्रांति करनी है । इनके क्रांति मतलब वर्ग संघर्ष और क्रांति नाम पर देश अराजकता हिंसा आग ढकेल देना । यह खुद बड़े महलों में रहते हैं । इस क्रांति के विचार अपनाने निर्दोष सनातनी हिन्दू ही मारे जाएंगे यह नक्सली वामपंथी किसी के सगे है इन नक्सली वामपंथियों एक प्रश्न है कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के ब्राह्मण पदाधिकारियों यूरोशिया कब भेज रहे हैं पहले उन्हें भेजकर क्रांति शुरुआत करनी चाहिए । इसलिए मैं कह रहा हूं यह नक्सली वामपंथी किसी सगे नहीं है जो लोग वामपंथी विचार आलवा दूसरे विचार बर्दाश्त भी नहीं कर सकते । वह आपके सगे कैसे हो सकते हैं । इसलिए इनके बहकावे आने से बचे जो लोग ब्राह्मण और बनियों को भारत छोड़ने की बात कर रहे इस तरह कहने वाले लाखों आये और चले गए ब्राह्मण बनिया आज भी वहीं कल भी वही रहेगा। 

जय श्री कृष्ण
दीपक कुमार द्विवेदी

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