सनातन विचार ही वह प्रकाश है, जहाँ से जीवन, धर्म और कर्तव्य—तीनों का सत्य प्रकट होता है।

जनसंख्या असुंतलन से उत्पन्न होने वाले खतरे क्या क्या है ?

भारत समेत दुनिया भर के देशों में जनसंख्या असुंतलन कारण बड़ी गंभीर समस्याए उत्पन्न हुई । जनसंख्या वृद्धि एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है पिछले 300 से वर्ष में दुनिया जनसंख्या तेजी वृद्धि देखी गई और लगातार देख जा रही है इस वृद्धि दर से भारत भी अछूता नहीं रहा है । भारत की पिछले 110 वर्ष में 407%64 वृद्धि दर देखी गई है मैं आप लोगों के सामने पिछले 100 वर्ष जनसंख्या के आंकड़े रखना चाहूंगा जिसे देखकर आप लोग चौंक भी सकते हैं 

वर्ष कुल जनसंख्या दशकीय वृद्धि दर 

1901। 23,83,96327। NIL 

1911। 25,20,93,390। 5.75%

1921. 25,13,212,13. 0.311%

1931. 27,89,77,238. 14.22%

1941. 31,36,60,580 13.31 %

1951. 36,10,880,90. 21,61 %

19 61. 43,92,34,771. 24,80

1971. 54,81,59,652,. 24.66%

1981. 68,33,29,097. 23.87

1991 84,64,21,039,. 21.54

2001.102,87,37,434. 21.54

2011. 121,01,93,442

2021 अनुमानित जनसंख्या 1,40,7,563,542

वर्ष। लिंग अनुपात महिलाए 

1901 972

1911। 964

1921। 955

1931। 950

1941 945 

1951। 946

1961 941

1971 930

1981। 934

1991 927

2001 933

2011 943 

वर्ष। हिंदू। मुस्लिम।               

1951। 30,35 करोड़ 3,54 करोड़

1961। 36,65। करोड़ 4,69 करोड़ 

1971। 45,33करोड़। 6,34 करोड़ 

1981। 56,24 करोड़ 8,03करोड़ 

1991। 69,01 करोड़ 10,67 करोड़

2001 82,76 करोड़। 13,82 करोड़  

2011। 96,61 करोड़ 17,22 करोड़ 

वर्ष। हिंदू प्रतिशत। मुस्लिम प्रतिशत

1951। 83,4 % 10.7%

1961। 82.7 %। 11.2%

1971। 82.6। %। 12.6%

1981। 82.6%। 13.6%

1991। 81.6%। 12.6

2001। 80.2। 13.4%

2011। 79.8। 14.2 

भारत में जनसंख्या असुंतलन के कारण कई समास्याएं उत्पन्न हुई जैसे गरीबी बेरोजगारी भ्रष्टाचार संप्रदायिक तनाव और डेमोग्राफी बदलने का प्रयास तक किया गया है ।भारत की वास्तविक जनसंख्या कितनी इसका अनुमान लगाना संभव नहीं है क्योंकि भारत राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर भी नहीं है बड़े पैमाने बंग्लादेश से सटे सीमावर्ती राज्यो में बड़े पैमाने घुसपैठ हुई कुछ संस्थाओं का मानना कम से कम में भारत में 8 से 10 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठिए निवास करते हैं । घुसपैठ समास्या कारण जनसंख्या असंतुलन का खतरा उत्पन्न हुआ है जिससे भविष्य आतंरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां सामने आ सकती है। उसके आलावा अवैध मतांतरण के मध्यम से डेमोग्राफी बदलने का प्रयास किया जा रहा है इन चुनौतियों निपटाने के लिए हम लोग कोई तैयारी न कोई नीति हम इसी जनसंख्या असुंतलन का शिकार 1947 में विभाजन के रूप में देख चुके हैं कैसे भारत का विभाजन मजहब के आधार पर कर दिया गया । सिस्टम कुछ नहीं कर पाया था । उसी तरह की परिस्थिति आज भी है हम लोग सचेत नहीं हो रहे जिसका परिणाम हमें भोगना पड़ सकता है। अब वक्त आ गया जनसंख्या असुंतलन पर गंभीर मंथन किया जाए इस समास्या का ठोस समाधान निकाला जाए नहीं तो बहुत देर हो जाएगी। 

जय श्री कृष्ण
दीपक कुमार द्विवेदी

टिप्पणियाँ